ईरान पर अमेरिका-इज़रायल के कायराना साम्राज्यवादी-ज़ायनवादी हमले के ख़िलाफ़ और ईरानी जनता के समर्थन में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन!
बिगुल संवाददाता
3 मार्च को भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी (RWPI) द्वारा अमेरिका-इज़रायल के साम्राज्यवादी-ज़ायनवादी गठजोड़ द्वारा ईरान पर किये गये कायराना और बर्बर आक्रमण के ख़िलाफ़ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। इसमें फ़िलिस्तीन के साथ एकजुट भारतीय जन (IPSP), बिगुल मज़दूर दस्ता, दिशा छात्र संगठन, नौजवान भारत सभा तथा अन्य प्रगतिशील जनसंगठनों ने भाग लिया। इसके अलावा साम्राज्यवादी-ज़ायनवादी गठजोड़ द्वारा उत्पन्न गम्भीर और अस्थिर संकट को लेकर चिन्तित नागरिकों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और प्रोफ़ेसरों ने भी इस विरोध प्रदर्शन में भागीदारी की। यह विरोध प्रदर्शन देश की राजधानी दिल्ली के अलावा पुणे, हैदराबाद इत्यादि अन्य जगहों पर किया गया।
विरोध प्रदर्शन की शुरुआत ईरान की आम मेहनतकश जनता के साथ एकजुटता में क्रान्तिकारी नारों के साथ की गयी। इसके बाद वक्ताओं ने इस मामले पर भारत सरकार की चुप्पी भरे रवैये की मुखर आलोचना की और ईरान पर अमेरिका-इज़रायल के इस साम्राज्यवादी युद्ध की कड़ी निन्दा की गयी। अलग-अलग संगठनों के वक्ताओं ने ईरान की जनता के साथ अपनी अटूट एकजुटता और समर्थन व्यक्त किया। वक्ताओं ने कहा कि ग़ाज़ा में चल रहे नरसंहार के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी का हालिया इज़रायल दौरा भारतीय शासक वर्ग के हितों को दर्शाता है, न कि आम मेहनतकश जनता के। भारत जैसे देश, जो खुद साम्राज्यवाद का शिकार रहे हैं, उनके हित ईरान और पश्चिम एशिया की मेहनतकश जनता के साथ जुड़े हुए हैं। भारत का पक्ष हमेशा से ही फ़िलिस्तीन और ईरान के साथ रहा है। लेकिन आज फ़ासीवादी मोदी सरकार अम्बानी-अडानी जैसे पूँजीपतियों के हितों को पूरा करने के लिए अमेरिका और हत्यारे इज़रायल के साथ खड़ी है। ये सीधे तौर पर हमारे देश के साथ गद्दारी है। भारत, जिसकी मिट्टी में भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरु, चन्द्रशेखर आज़ाद, बटुकेश्वर दत्त, भगवतीचरण वोहरा जैसे क्रान्तिकारियों ने जन्म लिया, साम्राज्यवाद मुर्दाबाद का नारा बुलन्द किया, उस भारत का हित कभी भी साम्राज्यवादी ताक़तों के साथ नहीं हो सकता है। लेकिन सावरकर के वंशज इस बात को बिल्कुल नहीं समझ सकते हैं। इन्होंने खुद अपने देश के क्रान्तिकारियों के साथ गद्दारी करके पूरे आज़ादी के आन्दोलन में अंग्रेज़ों की जी-हुज़ूरी करने का काम किया है। प्रधानमंत्री मोदी भले ही इज़रायल में जाकर उसका समर्थन करें या उसे “फादरलैंड” का दर्जा दें लेकिन भारत की आम मेहनतकश जनता हमेशा से ही फ़िलिस्तीन और ईरान की जनता के साथ खड़ी है और खड़ी रहेगी।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि इस युद्ध के ज़रिये अमेरिकी साम्राज्यवाद अपने लठैत ज़ायनवादी इज़रायल के साथ मिलकर पश्चिम एशिया में एक के बाद एक आक्रामक विस्तारवादी मंसूबों को अंजाम दे रहा है। कच्चे माल, प्राकृतिक संसाधनों और बाज़ारों पर क़ब्ज़े की इस लड़ाई में आम जनता पिस रही है और युद्ध का सीधा असर उनके ऊपर पड़ रहा है। ईरान के साथ कई हफ़्तों तक चली बातचीत के नाटक के बाद, अमेरिकी साम्राज्यवाद ने अपने पश्चिम एशियाई गुण्डे इज़रायल के साथ मिलकर 28 फ़रवरी को तेहरान सहित ईरान के विभिन्न शहरों पर बमबारी कर एक क्रूर साम्राज्यवादी युद्ध छेड़ दिया है। इस युद्ध में सैकड़ों निर्दोष नागरिकों, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, की जान जा चुकी है, साथ ही ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली ख़ामेनेई, रक्षा मंत्री और शीर्ष सैन्य नेतृत्व की हत्या कर दी गयी है। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इज़रायल के तेल अवीव, यरुशलम, हाइफ़ा समेत क़तर, यूएई, सऊदी अरब, कुवैत, इराक, बहरीन और ओमान जैसे खाड़ी देशों में अमेरिकी और इज़रायली सैन्य ठिकानों पर सैकड़ों मिसाइल हमले किये हैं और बिना किसी उकसावे के किए गये इस साम्राज्यवादी हमले का मुँहतोड़ जवाब दिया है। इस तरह पूरा पश्चिम एशिया एक बार फिर विनाशकारी युद्ध में घिर गया है, जिसका ज़िम्मेदार अमेरिका-इज़रायल का साम्राज्यवादी-ज़ायनवादी गठजोड़ है।
यह ध्यान देने योग्य है कि इस युद्ध के लिए पूरी तरह से अमेरिकी साम्राज्यवाद और उसका सहयोगी इज़रायल ज़िम्मेदार हैं। यह युद्ध पूरी तरह से बिना उकसावे के शुरू किया गया है, जबकि पिछले वर्ष 12 दिनों के युद्ध के बावजूद ईरान बातचीत के लिए तैयार था और ओमान की मध्यस्थता में अमेरिका के साथ वार्ता कर रहा था। ट्रंप के नेतृत्व वाला अमेरिकी साम्राज्यवाद एक बार फिर अन्तरराष्ट्रीय क़ानूनों और मानदण्डों को धता बताते हुए विश्वासघाती तरीक़े से आगे बढ़ा है। इससे पहले इसी वर्ष उसने वेनेज़ुएला पर हमला कर उसके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का अपहरण करके भी यह दिखा दिया था कि वह अन्तरराष्ट्रीय क़ानून और राष्ट्रीय सम्प्रभुता की परवाह नहीं करता।
ईरान पर अमेरिका-इज़रायल का यह हमला एक बार फिर साबित करता है कि जब तक साम्राज्यवादी- पूँजीवादी व्यवस्था क़ायम रहेगी, तब तक मानवता को विनाशकारी युद्धों और असीम पीड़ा का सामना करना पड़ेगा। पश्चिम एशिया, विशेषकर ईरान, अपने तेल और गैस संसाधनों के कारण अमेरिकी सैन्य आक्रामकता का शिकार बना हुआ है। इराक, सीरिया और यमन पहले ही इन युद्धों से तबाह हो चुके हैं, और अब ईरान को भी अस्थिरता की ओर धकेला जा रहा है। हालाँकि ईरान की जवाबी कार्यवाई को देखकर अब अमेरिका और इज़राइल को हर बीतते दिन के साथ यह बात स्पष्ट होती जा रही है कि ईरान इराक़ या वेनेज़ुएला नहीं है और यह साम्राज्यवादी युद्ध ख़ुद अमेरिकी साम्राज्यवाद के लिए काफी मंहगा साबित हो रहा है।
एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप कह रहे हैं कि यह युद्ध ईरान की महिलाओं की आज़ादी के लिए लड़ा जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ़ स्कूल पर बमबारी करके अमेरिका सैकड़ों बच्चियों की हत्या कर रहा है। एपस्टीन फ़ाइल में नाम आने के बाद जिस तरह से पूरी दुनिया में डोनाल्ड ट्रम्प की थू थू हो रही है उससे लोगों का ध्यान भटकाने के लिए ईरान पर इस युद्ध को थोपा गया है। एपस्टीन फ़ाइल के गुनहगारों के मुँह से स्त्री अधिकारों की बात करना निश्चित ही इस सदी की सबसे बड़ी त्रासदी में से एक होगी!
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने यह भी कहा कि लोगों को ये बात गाँठ बाँध लेनी होगी कि इस युद्ध के प्रभाव केवल ईरान या पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेंगे। तेल और गैस आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक क़ीमतों में वृद्धि होगी, जिसका असर भारत सहित पूरी दुनिया पर पड़ेगा। यदि ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बन्द करता है (जोकि बाद में ईरान ने किया भी) या हूती विद्रोही लाल सागर में आपूर्ति रोकते हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगेगा। इतिहास गवाह है कि साम्राज्यवादी युद्धों की मार हमेशा आम जनता ने झेली है और इसलिए हमें इसका पुरज़ोर विरोध करना चाहिए। साथ ही, मोदी सरकार के जनविरोधी चरित्र के ख़िलाफ़ भी एकजुट होना चाहिए। हमें समझना होगा कि साम्राज्यवाद मानवता को सिवाय युद्ध, तबाही और नरसंहार के कुछ भी नहीं दे सकता है। हमें पिछले अनुभवों से सबक लेना होगा। अमेरिका-इज़रायल द्वारा ईरान पर किये गये विश्वासघाती और बिना किसी उकसावे के साम्राज्यवादी हमले के ख़िलाफ़ एकजुट होकर अपनी आवाज़ बुलन्द करनी होगी।
भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी (RWPI) ईरानी जनता के साथ एकजुटता व्यक्त करती है और अमेरिका-इज़रायल के साम्राज्यवादी-ज़ायनवादी गठजोड़ द्वारा किये गये इस कायरतापूर्ण और घृणित आक्रमण के ख़िलाफ़ खड़ी है। कार्यक्रम के दौरान ईरानी जनता के समर्थन में क्रान्तिकारी गीत प्रस्तुत किया गया तथा प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स लीग के सदस्यों द्वारा कला के माध्यम से एकजुटता व्यक्त की गयी।
मज़दूर बिगुल, मार्च 2026













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