रिचा कम्पनी के मज़दूरों की हड़ताल का दूसरा दिन। हर ज़ोर जुल्म की टक्कर में, संघर्ष हमारा नारा है!

वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर पूरे गुड़गांव–मानेसर पट्टी के मज़दूर आन्दोलनरत हैं।

8 अप्रैल, मानेसर। मानेसर स्थित रिचा एक्सपोर्ट कम्पनी में भी मज़दूरों ने वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर हड़ताल शुरू कर दी है। कंपनी के लगभग 500 मज़दूरों ने आज सुबह फैक्ट्री गेट पर रोष प्रदर्शन करते हुए अपनी जायज़ मांगें प्रबंधन के सामने रखीं। लेकिन प्रबंधन और ठेकेदारों ने मज़दूरों की मांगों को मानने से इनकार कर दिया, जिसके बाद मज़दूरों ने एकजुट होकर हड़ताल की घोषणा कर दी।
हड़ताल शुरू होते ही प्रबन्धन द्वारा पुलिस-प्रशासन के ज़रिये मज़दूरों की आवाज़ दबाने की कोशिश की जा रही है। गुड़गांव तहसील के बाहर मज़दूरों का धरना जारी है और उन्होंने साफ़ कर दिया है कि मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी।
रिचा एक्सपोर्ट कंपनी में मज़दूरों को मात्र 10–11 हज़ार रुपये वेतन दिया जा रहा है। वहीं महंगी गैस और बढ़ती महंगाई के कारण मज़दूरों का जीवन और अधिक संकटग्रस्त होता जा रहा है। साफ़ है कि इतने कम वेतन में गुड़गांव जैसे शहर में एक सामान्य और सम्मानजनक जीवन जीना संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में अधिकांश मज़दूरों को 12 घण्टे की शिफ्ट में काम करना पड़ता है, क्योंकि 8 घण्टे के काम के बदले मिलने वाली मज़दूरी इतनी कम है कि उससे चिकित्सा, शिक्षा जैसी मूलभूत आवश्यकताएँ भी पूरी नहीं हो पातीं। एक्सपोर्ट कम्पनियों में लाखों मज़दूर बेहद कम मजदूरी पर ठेकेदारों, दलालों और कम्पनियों के शोषण का शिकार हैं।
बिगुल मज़दूर दस्ता के साथियों ने हड़ताल स्थल पर सभा को सम्बोधित करते हुए बताया कि आज आईएमटी मानेसर में उठी वेतन बढ़ोतरी और मज़दूरों के जायज़ हक-अधिकारों की लड़ाई अब पूरे गुड़गांव, बिनौला, धारूहेड़ा और बावल सहित ऑटोमोबाइल और एक्सपोर्ट क्षेत्रों में फैल रही है। मज़दूरों की मांगें पूरी तरह जायज़ हैं—न्यायपूर्ण वेतन, बेहतर कार्य-परिस्थितियाँ और ठेका प्रथा का अंत।
बिगुल मज़दूर दस्ता ने अपील की है कि गुरुग्राम, दिल्ली और पूरे एनसीआर के मज़दूर एक साझा मांग-पत्र तैयार करें और तालमेल कमेटी बनाकर इस संघर्ष को आगे बढ़ाएँ।
 

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