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हैदराबाद के जीडीमेटला औद्योगिक क्षेत्र में गुड़गाँव, मानेसर और नोएडा के संघर्षरत मज़दूरों व मज़दूर कार्यकर्ताओं की गैर-कानूनी गिरफ़्तारियों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन।

कार्यकर्ताओं ने अपनी बात रखते हुए बताया कि यह पहली गिरफ़्तारी नहीं है। अब तक कई मजदूरों और मज़दूर कार्यकर्ता पुलिस के दमन और विच-हंट का शिकार हो चुके हैं। मज़दूर बढ़ती महँगाई और गैस की किल्लत के चलते लगातार वेतन बढ़ोतरी की माँग कर रहे थे। लेकिन फ़ैक्टरी प्रबंधन और सरकार की ओर से कोई सुनवाई नहीं होने के कारण मज़दूर अपनी माँगों को लेकर हड़ताल करने को मजबूर हुए। गुड़गाँव–मानेसर औद्योगिक पट्टी में मज़दूर 2 अप्रैल से अपनी माँगों को लेकर अलग-अलग कंपनियों में हड़ताल कर रहे हैं। वेतन बढ़ोतरी, 8 घंटे का कार्यदिवस, ओवरटाइम का दोगुनी दर से भुगतान और सस्ती दर पर कैंटीन की सुविधा—इन माँगों को लेकर मज़दूर हड़ताल पर हैं। यह हड़ताल कुछ दिन पहले नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में भी शुरू हुई।

तेलंगाना की फ़ार्मा-केमिकल फ़ैक्ट्री में भीषण आग – मालिक के मुनाफ़े की भट्ठी में जलकर ख़ाक हो गये 52 मज़दूर

सरकारी आँकड़ों के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों में भारत में 269 से अधिक केमिकल फ़ैक्टरियों, कोयला खदानों और निर्माण स्थलों पर बड़े औद्योगिक हादसे हुए हैं। इन सभी हादसों की जड़ में मुनाफ़े पर टिकी पूँजीवादी व्यवस्था ही है। ये बढ़ती औद्योगिक दुर्घटनाएँ पूँजीवाद के मानवद्रोही चरित्र को सरेआम उजागर कर देती हैं। आज मज़दूरों के सामने सवाल यह है कि वे आख़िर कब तक पूँजीपतियों के मुनाफ़े की भट्टी में झोंके जाने को बर्दाश्त करते रहेंगे? इससे पहले कि पूँजीवाद हमारी ज़िन्दगी और हमारे सपनो को जलाकर ख़ाक कर दे हमें पूँजीवाद को ख़ाक में मिलाने के लिए कमर कसनी होगी।