यूजीसी विनियम, 2026: सही क्रान्तिकारी अवस्थिति क्या होनी चाहिए?
इस पूरे मसले का सबसे ज़्यादा लाभ फ़ासीवादी भाजपा को होने वाला है क्योंकि एक तरफ़ अधूरे और भेदभाव रोकने के लिए नाकाफ़ी तथा ग़ैर-जनवादी नये गाइडलाइंस लाकर मोदी सरकार पिछड़ों और एससी/एसटी वर्ग के हितैषी के रूप में अपने को पेश कर रही है; वहीं दूसरी तरफ सवर्ण जातियों का जो हिस्सा विरोध में उतर भी रहा है वह मुख्यतः और मूलतः फ़ासीवादी-जातिवादी विचारों का ही वाहक है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नये गाइडलाइंस पर स्टे लगा देने के बाद भाजपा आसानी से इस आबादी को अपनी साम्प्रदायिक राजनीति के आधार पर साध लेगी। एक ऐसे महत्वपूर्ण दौर में जब पूरी दुनिया एक उथल-पुथल के मुहाने पर खड़ी है, विदेश नीति में मुँह की खाने के बाद मोदी सरकार की “लोकप्रियता” तेज़ी से गिर रही है, इन्दौर में गन्दा पानी पीने से दर्जनों लोगों की मौत के बाद मोदी और भाजपा सरकार लगातार सवालों के घेरे में है, जब पूरे देश में बेरोज़गारी और महँगी शिक्षा छात्रों-युवाओं के सामने सुरसा के जैसे मुँह खोले खड़ी है, तब ऐसे दौर में यह ध्रुवीकरण भाजपा के लिए अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण करेगा।













