मेहनतकशों ने ठाना है, चारों लेबर कोड रद्द करवाना है।।
रविवार की सुबह ग्रेटर नोएडा के सुथ्याना गाँव में स्थित पवन एन्क्लेव कॉलोनी में बिगुल मज़दूर दस्ता के कार्यकर्ताओं ने घर–घर जाकर लोगों को मोदी सरकार द्वारा हाल ही में लागू किये गये चार लेबर कोड की असलियत से परिचित करवाया। गोदी मीडिया द्वारा लेबर कोड के बारे में जो भ्रम फैलाया जा रहा है — जैसे इसे “ऐतिहासिक”, “एक नये युग की शुरुआत” और “मज़दूर–हितैषी” क़रार देना — उसका असर मेहनतकश आबादी पर पड़ा है। जब लोगों को इसकी असलियत बतायी गयी तो वे आश्चर्यचकित होकर सुन रहे थे।जैसा कि आपको पता होगा, नोएडा/ग्रेटर नोएडा के दर्जनों औद्योगिक क्षेत्रों में लाखों मज़दूर काम करते हैं। यहाँ कपड़ा–एक्सपोर्ट की हज़ारों फ़ैक्ट्रियों में, मोबाइल–निर्माता कम्पनियों के बड़े–बड़े प्लांटों में, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटो–पार्ट्स बनाने वाली सैकड़ों कम्पनियों में लाखों पुरुष–महिला मज़दूर अमानवीय परिस्थितियों में काम करते हैं। यहाँ की हाई–राइज़ सोसायटियों और अपार्टमेंटों में, आवासीय सेक्टरों में हज़ारों घरेलू–कामगार काम करते हैं। तेज़ रफ़्तार से हो रहे निर्माण–कार्यों में हज़ारों मज़दूर काम कर रहे हैं। हज़ारों की संख्या में गिग–वर्कर्स रोज़ सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
सारी केन्द्रीय ट्रेड–यूनियनें एक समय में इन औद्योगिक क्षेत्रों में सक्रिय थीं, पर आर्थिक लड़ाइयाँ लड़ते–लड़ते, समझौतापरस्ती और तमाम राजनीतिक वजहों से आज ये लुप्तप्राय–प्रजाति में तब्दील हो चुकी हैं। आज ज़रूरत है कि मेहनतकशों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाकर क्रान्तिकारी यूनियनों के गठन के प्रयास तेज़ किये जाएँ।
बिगुल मज़दूर दस्ता के कार्यकर्ता लगातार यही काम कर रहे हैं। प्रचार–अभियान के दौरान लोगों के बीच लेबर कोडों के मज़दूर–विरोधी चरित्र का पर्दाफ़ाश किया गया तथा 3 दिसम्बर को दिल्ली के जन्तर–मन्तर पर चार लेबर कोडों के विरोध में होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की गयी। लोगों के बीच पर्चा–वितरण भी किया गया।













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