बिगुल मज़दूर दस्ता ने बीते 22 नवम्बर को अक्टूबर क्रान्ति की 108वीं वर्षगाँठ के अवसर पर हैदराबाद के जीडीमेटला औद्योगिक क्षेत्र की मज़दूर बस्ती सुभाष नगर में नुक्कड़ सभा करते हुए एक जुलूस निकाला। कार्यकर्ताओं ने अक्टूबर क्रान्ति की विरासत के महत्व पर बात रखते हुए मज़दूरों को जागरूक किया। कविता-पाठ और क्रान्तिकारी गीतों के माध्यम से मौजूदा पूँजीवादी व्यवस्था का पर्दाफ़ाश किया गया कि किस तरह मुनाफ़े की हवस में मज़दूरों की परिस्थितियों को अमानवीय बना दिया जाता है। सुभाष नगर के बाज़ार में निकाले गए जुलूस के दौरान नारे लगाए गए और पर्चे वितरित किए गए, साथ ही मज़दूरों को जाति-धर्म, भाषा और क्षेत्र की पहचान को छोड़कर मज़दूर वर्गीय एकता कायम करने का आह्वान किया गया।कार्यकर्ताओं ने बताया कि 1917 में रूस में एक वैकल्पिक व्यवस्था की स्थापना की गई थी। देश के मज़दूरों ने क्रान्तिकारी बोल्शेविक पार्टी के नेतृत्व में शोषणकारी पूँजीवादी व्यवस्था को उखाड़ फेंका और ख़ुद देश पर शासन किया। उन्होंने दुनिया को दिखाया कि वे न केवल दिनभर फ़ैक्ट्रियों में मेहनत कर सकते हैं, बल्कि श्रम के शोषण, गरीबी, भुखमरी और समाज की ऐसी कई समस्याओं को समाप्त करते हुए देश को भी प्रभावी ढंग से चला सकते हैं।
वर्तमान समाज में भी, अधिकांश मज़दूरों को मालिकों और पूँजीपतियों के मुनाफ़े के लिए अपनी जान जोख़िम में डालकर दिन-रात मेहनत करनी पड़ती है। जब तक उनके श्रम का दोहन मुट्ठी भर पूँजीपतियों द्वारा किया जाता रहेगा, यह अन्याय जारी रहेगा। मोदी सरकार द्वारा चार श्रम संहिताओं के लागू होने के साथ, मज़दूरों के संघर्ष को और तेज़ करने की ज़रूरत है। इसके लिए, मज़दूरों को एकजुट और संगठित होना होगा।
मज़दूरों ने सभाओं के दौरान कही गई बातों से सहमति जताई और उन्होंने अधिक जानकारी प्राप्त करने में दिलचस्पी दिखाते हुए कार्यकर्ताओं से सम्पर्क किया। उन्होंने अपने नम्बर साझा किए और आगे चर्चा के लिए बैठकों में भाग लेने की इच्छा व्यक्त की।













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