Category Archives: शिक्षा और रोज़गार

बेरोज़गारी का दानव लील रहा है युवा ज़ि‍न्दगि‍याँ

राष्‍ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्‍यूरो (एनसीआरबी) के आँकड़ों के मुताबिक 2018 में हर दिन औसतन 35 बेरोज़गारों और स्वरोज़गार से जुड़े 36 लोगों ने ख़ुदकुशी की। कुल मिलाकर 2018 में बेरोज़गार और स्वरोज़गार से जुड़े 26,085 लोगों ने जीवन से निराश होकर आत्महत्या कर ली!

दिल्‍ली विधानसभा चुनाव 2020 में फिर से आम आदमी पार्टी की जीत के मायने: एक मज़दूर वर्गीय नज़रिया

जिन्‍होंने भी केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के पूरे चुनाव अभियान को क़रीबी से देखा है, वह अच्‍छी तरह जानते हैं कि भाजपा के हिन्‍दुत्‍ववादी फ़ासीवाद के एजेण्‍डे के बरक्‍स, अरविन्‍द केजरीवाल ने कोई सही मायनों में सेक्‍युलर, जनवादी और प्रगतिशील एजेण्‍डा नहीं रखा था। उल्‍टे केजरीवाल ने ‘सॉफ़्ट हिन्‍दुत्‍व’ का कार्ड खेला। अपने आपको हिन्‍दू, हनुमान-भक्‍त आदि साबित करने में केजरीवाल ने कोई कसर नहीं छोड़ी। साथ ही, कश्‍मीर में 370 हटाने पर मोदी को बधाई देने से लेकर, जामिया और जेएनयू पर हुए पुलिसिया अत्‍याचार और शाहीन बाग़ और सीएए-एनआरसी-एनपीआर जैसे सबसे ज्‍वलन्‍त और व्‍यापक मेहनतकश आबादी को प्रभावित करने वाले प्रमुख मसलों के सवाल पर चुप्‍पी साधे रहने तक, केजरीवाल और आम आदमी पार्टी ने मोदी-शाह-नीत भाजपा के कोर एजेण्‍डा से किनारा काटकर निकल लेने (सर्कमवेण्‍ट करने) की रणनीति अपनायी। तात्‍कालिक तौर पर, इस रणनीति का फ़ायदा आम आदमी पार्टी को मिला है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2019 : शिक्षा के नग्न बाज़ारीकरण का घोषणापत्र

आख़िरकार लम्बे समय से जारी लुकाछिपी का खेल 1 जून 2019 को ख़त्म हो गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के चार ड्राफ़्ट और हज़ारों जन सुझावों को हज़मकर चुप्पी मारकर बैठ जाने वाली मोदी सरकार ने लोक सभा चुनाव के नतीजे आने के बाद अचानक कस्तूरीरंगन कमेटी द्वारा तैयार नयी शिक्षा नीति की रिपोर्ट सार्वजानिक कर दी।

बेरोज़गारी की भयावह स्थिति : पहली बार देश में कुल रोज़गार में भारी कमी!

ऐसे में फ़ासिस्ट मोदी सरकार की पूँजीपतियों को बहुत ज़रूरत है ता‍िक राष्ट्रवाद और धार्मिक जुनून के नशे की खुराकें देकर बेरोज़गार मज़दूरों और युवाओं को एकजुट होने और लड़ने से रोका जा सके। फिलहाल वे अपने मंसूबों में कामयाब होते दिख रहे हैं। क्या इस देश के मज़दूर और नौजवान ऐसे ही चुपचाप बर्बादी की ओर धकेले जाते रहेंगे?

हरियाणा में क्लर्क भर्ती ने खोली राज्य में बेरोज़गारी की पोल!

हरियाणा में क्लर्क भर्ती ने खोली राज्य में बेरोज़गारी की पोल! दर-दर की ठोकरें खा रहे युवा और उनके हितों का सौदा कर रहे चुनावी मदारी! हरियाणा चयन आयोग के…

बेरोज़गार छात्रों-युवाओं से हज़ारों करोड़ की कमाई कर रही बेशर्म सरकारें

बेरोज़गार छात्रों-युवाओं से हज़ारों करोड़ की कमाई कर रही बेशर्म सरकारें देश की करोड़ों युवा आबादी पिछले 45 वर्षों में अब तक की सबसे भयंकर बेरोज़गारी का सामना कर रही…

इलाहाबाद में एक और प्रतियोगी छात्रा की आत्महत्या!

इलाहाबाद में एक और प्रतियोगी छात्रा की आत्महत्या! हम चुप क्यों हैं? हम किसका इन्तज़ार कर रहे हैं? इलाहाबाद में धूमनगंज के कालिन्दीपुरम में रहने वाली प्रतियोगी छात्रा विनीता वर्मा…

शिक्षा के अधिकार के लिए देशभर में छात्र सड़कों पर!

शिक्षा के अधिकार के लिए देशभर में छात्र सड़कों पर! जेएनयू समेत विभिन्न विश्वविद्यालयों में फ़ीस बढ़ोत्तरी के ख़िलाफ़ छात्रों के जुझारू आन्दोलनों पर सरकारी दमन और झूठा संघी प्रचार…

विकराल बेरोज़गारी : ज़ि‍म्मेदार कौन? बढ़ती आबादी या पूँजीवादी व्यवस्था?

पिछले 15 अगस्त को देश के 72वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर से दहाड़ते हुए लम्बा-चौड़ा भाषण दिया और देश की “अल्पज्ञानी” जनता को ज्ञान के नये-नये पाठ पढ़ाये! इस बार माननीय प्रधानमंत्री जी ने ‘भारी जनसंख्या विस्फोट’ को लेकर विशेष चिन्ता भी ज़ाहिर की और उन्होंने जनता को ही इसके लिए ज़ि‍म्मेदार ठहराया।

आधुनिकीकृत मदरसा और शिक्षक बर्बादी और बदहाली के कगार पर

मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से शिक्षा तंत्र बुरी तरह से चौपट किया जा रहा है। इसका एक नमूना आधुनिकीकृत मदरसे भी हैं। ग़ौरतलब है कि 1992 में केन्द्र सरकार द्वारा मदरसों के आधुनिकीकरण हेतु उनमें हिन्दी, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान आदि आधुनिक शिक्षा देने के लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय द्वारा मानदेय पर शिक्षकों की व्यवस्था की गयी। इन आधुनिकीकृत मदरसों के शिक्षकों के मानदेय के लिए एक छोटा-सा अंश राज्य सरकार को और बाक़ी केन्द्र सरकार को देना था। राज्य सरकार द्वारा ग्रेजुएट शिक्षकों को 2000 रुपये एवं पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षकों को 3000 रुपये जैसी मामूली राशि मानदेय के रूप में वहीं केन्द्र सरकार द्वारा ग्रेजुएट शिक्षकों को 6000 एवं पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षकों को 12000 प्रतिमाह दी जाने की व्यवस्था की गयी थी।