Category Archives: शिक्षा और रोज़गार

‘वादा ना तोड़ो अभियान’ के तहत पटना में हुआ ‘रोज़गार अधिकार महाजुटान’

इस बार के बिहार विधान सभा चुनाव में रोज़गार एक मुख्य मुद्दा बनकर उभरा था और हर पार्टी द्वारा रोज़गार के मुद्दे पर बड़े-बड़े चुनावी वादे किये गये थे। उनमें से नीतीश की गठबन्धन सरकार ने 19 लाख रोज़गार का वादा किया था। इसी के मद्देनज़र बिहार में ‘वादा न तोड़ो अभियान’ की शुरुआत की गयी जिसमें कि सरकार से यह माँग की गयी कि वह 19 लाख रोज़गार कैसे देगी इसकी रूप रेखा जनता के सामने प्रस्तुत करे। इसके अलावा इस अभियान में राज्य स्तर पर भगतसिंह रोज़गार गारण्टी क़ानून बनाने की माँग उठायी गयी व और भी अन्य माँगें शामिल की गयीं।

महामारी और संकट के बीच पूँजीपतियों के मुनाफ़े में हो गयी 13 लाख करोड़ की बढ़ोत्तरी!

कोरोना महामारी की वजह से आजकल सभी काम-धन्धे बन्द हुए मालूम पड़ते हैं। लगभग हर गली-मोहल्ले में तो ही रोज़गार का अकाल ही पड़ा हुआ है। वहीं, दूसरी तरफ़, कोरोना काल में अम्बानी-अडानी आदि थैलीशाहों के चेहरे पहले से भी ज़्यादा खिले हुए हैं। करोड़ों-करोड़ का मुनाफ़ा खसोटकर वे अपनी महँगी पार्टियों में जश्न मना रहे हैं।

नयी शिक्षा नीति के तहत आँगनवाड़ी केन्द्रों में प्री-प्राइमरी की पढ़ाई; आँगनवाड़ी कर्मियों से बेगारी करवाने का नया तरीक़ा!

केन्द्र सरकार ने नयी शिक्षा नीति के तहत प्री-प्राइमरी के बच्चों की आँगनवाड़ी में अनिवार्य पढ़ाई के निर्देश दिये हैं। नयी शिक्षा नीति के तहत आने वाले दिनों में जल्द ही पूरी शिक्षा व्यवस्था की नयी रूपरेखा तैयार की जायेगी जिसमें एक महत्वपूर्ण बात यह है कि हर बच्चे के लिए आवश्यक प्री-प्राइमरी की पढ़ाई आने वाले समय में आँगनवाड़ी कर्मियों के ज़िम्मे होगी। इस नयी ज़िम्मेदारी के लिए आँगनवाड़ी महिलाकर्मियों की योग्यता कम से कम 12वीं पास होनी चाहिए।

हरियाणा सरकार का शिक्षा व इलाज के जनता के अधिकारों पर बड़ा हमला!

हरियाणा में मेडिकल की पढ़ाई की फ़ीस में बेतहाशा बढ़ोत्तरी कर दी गयी है। सरकारी कॉलेजों/संस्थानों में एमबीबीएस यानी मेडिकल में स्नातक/ग्रेजुएशन की फ़ीस पहले जहाँ सालाना तक़रीबन 53,000 होती थी वहीं अब इसे बढ़ाकर 80,000 कर दिया गया है। यही नहीं, इसमें हर वर्ष 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी भी की जायेगी। इसके अतिरिक्त प्रत्येक छात्र को दाखिले के समय फ़ीस के अलावा 10 लाख रुपये (घटा फ़ीस) का बॉण्ड भी भरना पड़ेगा। जैसे यदि प्रथम वर्ष के छात्र की सालाना फ़ीस होगी 80,000 रुपये तो उसे 9 लाख 20 हज़ार रुपये बॉण्ड के तौर पर भरने होंगे।

झूठे मुद्दों की भूलभुलैया से निकलो, रोज़गार के लिए सड़कों पर उतरो!

देश आज अभूतपूर्व बेरोज़गारी का सामना कर रहा है। सरकार या तो इस समस्या से पूरी तरह आँख चुराए हुए है या फिर जीडीपी में भारी गिरावट की तरह इसे भी “दैवी आपदा” साबित करने की कोशिश कर रही है। लेकिन अगर आपकी आँखों पर भक्ति की पट्टी नहीं बँधी है तो इस सच्चाई को समझना क़तई मुश्किल नहीं है कि बेरोज़गारी की इय भयावह हालत की ज़िम्मेदार पूरी तरह मोदी सरकार और उसके कारनामे हैं। अगर आप अब भी आँखों से यह पट्टी उतारने के लिए तैयार नहीं हैं, तो आपको शायद तब ही समझ में आयेगा जब बेरोज़गारी और महँगाई की आग आपके घर को झुलसाने लगेगी। उन जर्मनीवासियों की तरह जिनकी हिटलर भक्ति तब टूटी जब जर्मनी पूरी तरह बर्बाद हो गया।

बहाली के मुद्दे पर हरियाणा के 1983 पीटीआई शिक्षक संघर्ष की राह पर

यह रिपोर्ट लिखे जाने तक दिनांक 8 सितम्बर को पीटीआई शिक्षकों के धरने को 85 दिन हो चुके हैं। भाजपा-जजपा सरकार इन शिक्षकों को लगातार बरगलाने पर लगी है लेकिन शिक्षक भी हार मानने को तैयार नहीं हैं। नित-नये ढंग से पीटीआई शिक्षक अपनी एकजुटता का इज़हार कर रहे हैं। विभिन्न कर्मचारी यूनियन और जन संगठन भी शिक्षक आन्दोलन का समर्थन कर रहे हैं।

हरियाणा में शिक्षा व्यवस्था और स्थायी रोज़गार सरकारी हमले की चपेट में !

हरियाणा की खट्टर-दुष्यन्त के नेतृत्व वाली भाजपा-जजपा ठगबन्धन सरकार प्रदेश के 450 स्कूलों में विज्ञान की पढ़ाई बन्द करने जा रही है। यह क़दम बच्चों की कम संख्या के नाम पर उठाया जा रहा है। होना तो यह चाहिए था कि सरकारी मशीनरी द्वारा प्रचार करके और पढ़ाई का स्तर सुधारकर सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या और फ़िर स्कूलों की संख्या को भी बढ़ाया जाता किन्तु यहाँ यह जनविरोधी सरकार विभिन्न संकायों की पढ़ाई और स्कूलों को ही बन्द करने पर तुली हुई है!

‘नयी शिक्षा नीति 2020’ : लफ़्फ़ाज़ि‍यों की आड़ में शिक्षा को आम जन से दूर करने की परियोजना

छात्रों-युवाओं और बुद्धिजीवियों के तमाम विरोध को दरकिनार करते हुए दिनांक 29 जुलाई के दिन ‘नयी शिक्षा नीति 2020’ को मोदी सरकार के कैबिनेट ने मंज़ूरी दे दी है। यह शिक्षा नीति शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी निवेश को घटायेगी और देशी-विदेशी बड़ी पूँजी के लिए शिक्षा क्षेत्र के दरवाज़े खोलेगी। व्यापक मेहनतकश जनता के बेटे-बेटियों के लिए शिक्षा प्राप्त करने के रास्ते और भी संकरे हो जायेंगे।

हरियाणा में युवाओं, कर्मचारियों और जनता के हितों पर खट्टर सरकार का बड़ा हमला!

हाल ही में भाजपा-जजपा की खट्टर सरकार ने हरियाणा में अगले 1 साल तक सरकारी भर्तियों पर रोक लगाने का फ़रमान सुनाया है। खट्टर सरकार द्वारा यह बेहूदा निर्णय उस समय लिया गया है जब प्रदेश में बेरोज़गारी का आँकड़ा बुलन्दियों को छू रहा है। इसके अलावा कर्मचारियों के महँगाई, एलटीसी जैसे भत्तों पर रोक लगा दी गयी है। जल्द ही अन्य हक़ों को छीने जाने का भी ऐलान होने वाला है।

बेतहाशा बढ़ती बेरोज़गारी और ढपोरशंखी सरकारी योजनाएँ

सी.एम.आइ.ई. (सेन्टर फ़ॉर मॉनिटरिंग इण्डियन इकोनॉमी) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक़ देश के शहरी क्षेत्र में बेरोज़गारी दर ने पिछले 45 सालों के सारे कीर्तिमान तोड़ डाले हैं। दिसम्बर 2019 में यह दर 9 फ़ीसदी थी। जनवरी 2020 तक, महज़ एक महीने में तेज़ रफ़्तार से बढ़ता हुआ यह आँकड़ा 9.9 फ़ीसदी तक जा पहुँचा। केवल 15 से लेकर 29 वर्ष के आयु वाले शहरी नौजवानों के बीच ही बेरोज़गारी की दर देखी जाये तो यह 22.5 फ़ीसद की ऊँचाई तक पहुँच चुकी है।