जल्द -जल्द पैर बढ़ाओ ,आओ ,आओ!

सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’  

जल्द -जल्द पैर बढ़ाओ, आओ, आओ!
आज अमीरों की हवेली
किसानों की होगी पाठशाला,
धोबी, पासी, चमार, तेली
खोलेंगे अंधरे का ताला,
एक पाठ पढेंगे, टाट बिछाओ|
यहाँ जहाँ सेठ जी बैठे थे
बनिये की आँख दिखाते हुए,
उनके ऐंठाये ऐंठे थे
धोखे पर धोखा खाते हुए,
बैंक किसानों का खुलवाओ|
सारी संपत्ति देश की हो,
सारी आपत्ति देश की बने,
जनता जातीय वेश की हो,
वाद से विवाद यह ठने,
कांटा काँटे से कढ़ाओ |