हैदराबाद के जीडीमेटला औद्योगिक क्षेत्र में गुड़गाँव, मानेसर और नोएडा के संघर्षरत मज़दूरों व मज़दूर कार्यकर्ताओं की गैर-कानूनी गिरफ़्तारियों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन।
मज़दूर बिगुल ने 11 और 12 अप्रैल को हैदराबाद के जीडीमेटला औद्योगिक क्षेत्र की मज़दूर बस्तियों—सुभाष नगर और रामि रेड्डी नगर—में गुड़गाँव, मानेसर और नोएडा के मज़दूरों व मज़दूर कार्यकर्ताओं पर हो रहे पुलिसिया दमन के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया।
ज्ञात हो कि कल शाम यूपी पुलिस ने चार मज़दूर कार्यकर्ताओं—रुपेश, सृष्टि, आकृति और मनीषा—को नोएडा मेट्रो स्टेशन से ग़ैर-कानूनी तरीके से उठाया। अब तक यूपी पुलिस उनकी स्थिति के बारे में कोई भी जानकारी देने से इनकार कर रही है। आज, जब दो वकील ज़मानत के लिए सूरजपुर कोर्ट गए थे, तो वहाँ मौजूद मज़दूर कार्यकर्ताओं के साथ उन्हें भी यूपी पुलिस ने ग़ैर-कानूनी तरीके से हिरासत में ले लिया। यह सब यूपी पुलिस की खुली गुंडागर्दी को दर्शाता है।
कार्यकर्ताओं ने अपनी बात रखते हुए बताया कि यह पहली गिरफ़्तारी नहीं है। अब तक कई मजदूरों और मज़दूर कार्यकर्ता पुलिस के दमन और विच-हंट का शिकार हो चुके हैं। मज़दूर बढ़ती महँगाई और गैस की किल्लत के चलते लगातार वेतन बढ़ोतरी की माँग कर रहे थे। लेकिन फ़ैक्टरी प्रबंधन और सरकार की ओर से कोई सुनवाई नहीं होने के कारण मज़दूर अपनी माँगों को लेकर हड़ताल करने को मजबूर हुए। गुड़गाँव–मानेसर औद्योगिक पट्टी में मज़दूर 2 अप्रैल से अपनी माँगों को लेकर अलग-अलग कंपनियों में हड़ताल कर रहे हैं। वेतन बढ़ोतरी, 8 घंटे का कार्यदिवस, ओवरटाइम का दोगुनी दर से भुगतान और सस्ती दर पर कैंटीन की सुविधा—इन माँगों को लेकर मज़दूर हड़ताल पर हैं। यह हड़ताल कुछ दिन पहले नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में भी शुरू हुई।
फ़ैक्टरी मालिकों की सेवा में लगी भाजपा सरकार ने पुलिस के दम पर मज़दूरों व मज़दूर कार्यकर्ताओं को हड़ताल तोड़ने के लिए निशाना बनाया। लाठीचार्ज और बल-प्रयोग के ज़रिये उनका दमन किया गया और उन्हें बिना किसी ठोस कारण के हिरासत में लेकर डराया गया, ताकि वे चुपचाप काम पर वापस लौट जाएँ और हड़ताल समाप्त कर दें। अब तक हरियाणा पुलिस ने 55 मज़दूरों पर झूठे इल्ज़ाम लगाकर एफआईआर दर्ज की है और उन्हें जेल भेज दिया गया है।
कार्यकर्ताओं ने यह भी बताया कि 5 अप्रैल को ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन (AICWU) के कार्यकर्ता शाम मूर्ति और 9 अप्रैल को मज़दूर कार्यकर्ता वीरेंद्र को भी ग़ैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया और देर रात तक थाने में बैठाकर प्रताड़ित किया गया। वीरेंद्र के साथ मारपीट की गई और उनकी पत्नी के साथ बदसलूकी की गई। वीरेंद्र को लंबे समय तक डराने-धमकाने के बाद उनसे बंदूक की नोक पर खाली काग़ज़ पर हस्ताक्षर कराए गए और कहा गया कि उन्हें आगे भी जाँच-पड़ताल के लिए थाने आना पड़ेगा। इसके अलावा, 7 अप्रैल को बिगुल मज़दूर दस्ते से जुड़े सनी और सार्थक को ज़ोर-ज़बरदस्ती करते हुए हड़ताल स्थल से उठा लिया गया। इसी तरह बेलसोनिका यूनियन के महासचिव अजीत सिंह और इंक़लाबी मज़दूर केन्द्र के सदस्यों को भी हरियाणा पुलिस द्वारा लगातार निशाना बनाया जा रहा है।
इस समय हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकार का रवैया साफ़ दर्शाता है कि वे पूँजीपतियों के मुनाफ़े की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। वे पुलिस के दम पर डर का माहौल बनाकर इन हड़तालों को तोड़ना चाहते हैं।
मज़दूर बिगुल सरकार और पुलिस की इस गुंडागर्दी और विच-हंट का पुरज़ोर विरोध करता है। मज़दूर बिगुल माँग करता है कि यूपी पुलिस चारों मज़दूर कार्यकर्ताओं—रुपेश, सृष्टि, आकृति और मनीषा—को तत्काल रिहा करे। यदि उनके ख़िलाफ़ कोई एफआईआर दर्ज है, तो उसकी जानकारी तुरंत सार्वजनिक की जाए।
अभियान के दौरान कुछ ठेकेदारों ने अभियान को बाधित करने की कोशिश की, लेकिन मज़दूरों ने नारा लगाकर मज़दूर बिगुल के कार्यकर्ताओं का समर्थन किया और अंत तक साथ खड़े रहे। कई मज़दूरों ने आगे बातचीत के लिए अपना सम्पर्क दिए।

























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