जो पैदा होंगी हमारे बाद

अज्ञात

ये मत कहो बहनो कि तुम कुछ नहीं कर सकतीं
आस्था की कमी अब और नहीं
हिचक अब और नहीं
आओ, पूछें अपने आप से
क्या चाहते हैं हम?

पूर्ण मुक्ति चाहिए, नहीं चाहते कम
उड़ाने दो माखौल उन्हें, रुक जायेगी हँसी एक दिन
वे दिन क्या दूर हैं?
क्या फ़र्क पड़ता है उससे।

संघर्षों में झेलनी हैं दिक्क़तें और तकलीफ़ें हमें
सुख उन बहनों के लिए होगा, जो पैदा होंगी हमारे बाद।