उद्धरण
“जिस वर्ग के पास बड़े पैमाने पर लूटने-खसोटने की ताक़त होती है उसके पास सरकार को नियन्त्रित करने और अपनी लूट-खसोट को क़ानूनी जामा पहनाने की भी ताक़त होती है!”
“नागरिक अवज्ञा हमारी समस्या नहीं है। हमारी समस्या है नागरिकों की आज्ञाकारिता। हमारी समस्या है कि दुनियाभर में लोग नेताओं के तानाशाही आदेशों का पालन करते रहे हैं—और इस आज्ञाकारिता के कारण करोड़ों लोग मारे गये हैं। —हमारी समस्या यह है कि दुनियाभर में ग़रीबी, भुखमरी, अज्ञान, युद्ध और क्रूरता का सामना कर रहे लोग आज्ञाकारी बने हुए हैं। हमारी समस्या यह है कि लोग आज्ञाकारी हैं जबकि जेलें मामूली चोरों से भरी हुई हैं— बड़े चोर देश को चला रहे हैं। यही हमारी समस्या है।”
“पूँजीवादी समाज में स्वतन्त्रता हमेशा वैसी ही होती है जैसी वह प्राचीन यूनानी गणतन्त्रों के समय में होती थी: दास स्वामियों के लिए स्वतन्त्रता।”
मज़दूर बिगुल, मई 2014
















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