हिटलर के तम्बू में

नागार्जुन

Günther_Strupp_woodcut_-_Kemnaअब तक छिपे हुए थे उनके दाँत और नाख़ून।
संस्कृति की भट्ठी में कच्चा गोश्त रहे थे भून।
छाँट रहे थे अब तक बस वे बड़े-बड़े क़ानून।
नहीं किसी को दिखता था दूधिया वस्त्र पर ख़ून।
अब तक छिपे हुए थे उनके दाँत और नाख़ून।
संस्कृति की भट्ठी में कच्चा गोश्त रहे थे भून।

मायावी हैं, बड़े घाघ हैं, उन्हें न समझो मन्द।
तक्षक ने सिखलाये उनको ‘सर्प नृत्य’ के छन्द।
अजी, समझ लो उनका अपना नेता था जयचन्द।
हिटलर के तम्बू में अब वे लगा रहे पैबन्द।
मायावी हैं, बड़े घाघ हैं, उन्हें न समझो मन्द।