(मज़दूर बिगुल के जून 2026 अंक में प्रकाशित लेख। अंक की पीडीएफ़ फ़ाइल डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें और अलग-अलग लेखों-ख़बरों आदि को यूनिकोड फ़ॉर्मेट में पढ़ने के लिए उनके शीर्षक पर क्लिक करें)

सम्पादकीय

बारह साल, जनता बेहाल – टूटे सपनों का अम्बार! कौन है इसका ज़िम्मेदार ?

अर्थनीति : राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

क्यों लगातार गिर रहा है भारतीय रुपया? / अभिनव

एक इंसान जैसी ज़िन्दगी जीने के लिए न्यूनतम मज़दूरी कितनी होनी चाहिए? / सुजय

श्रम कानून

कर्नाटक और तेलंगाना में न्यूनतम वेतन वृद्धि : नाकाफ़ी और देरी से लागू की गयी बढ़ोत्तरी / सनी

फासीवाद / साम्‍प्रदायिकता

जनता के विरोध से घबराकर उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बार फिर लगाया एस्मा!

पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार और बुलडोज़र का आतंक! / अनन्‍त

विशेष लेख / रिपोर्ट

कॉकरोच जनता पार्टी और उसकी लोकप्रियता : भारतीय जनता में व्‍यवस्‍था और मौजूदा सरकार के प्रति बढ़ते गुस्‍से व असन्‍तोष और साथ ही विकल्‍पहीनता की अभिव्‍यक्ति / गायत्री भारद्वाज

बुर्जुआ जनवाद – दमन तंत्र, पुलिस, न्यायपालिका

करोड़ों लोगों के वोट देने के बुनियादी राजनीतिक अधिकार छीनने वाली एसआईआर (SIR) की क़वायद पर सर्वोच्च न्यायालय की मुहर! / आकाश

नोएडा मज़दूर आन्दोलन के दौरान गिरफ़्तार राजनीतिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, छात्रों-कलाकारों का दमन व ‘विच हण्ट’ जारी! / उदय

बुर्जुआ जनवाद – चुनावी नौटंकी

तृणमूल काँग्रेस (टीएमसी) में मची भगदड़ के मायने / आशीष, शिशिर

साम्राज्यवाद / युद्ध / अन्धराष्ट्रवाद

अमानवीयता की हदें पार कर रही है क्यूबा में अमेरिकी साम्राज्यवाद की घेराबन्दी / आनन्द

शिक्षा और रोजगार

“आँकड़े छिपाओ, बेरोज़गारी भगाओ!” बेरोज़गारी से लड़ने का मोदी सरकार का नायाब नुस्ख़ा / वारुणी

औद्योगिक दुर्घटनाएं

विशाखापट्टनम स्टील प्लाण्ट से लेकर सूरत के सेप्टिक टैंक तक कार्यस्थल पर मज़दूरों की मौतों का सिलसिला बदस्तूर जारी है! / आनन्द

गतिविधि रिपोर्ट

शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफ़े की माँग को लेकर दिल्ली के जन्तर-मन्तर पर छात्रों-युवाओं का विरोध प्रदर्शन

‘नोएडा के मज़दूरों और कार्यकर्ताओं की रिहाई के लिए अभियान’ (CaRWAN) के बैनर तले दिल्ली में विरोध प्रदर्शन

बढ़ती महँगाई और ईंधन की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी के ख़िलाफ़ दिल्ली में विरोध प्रदर्शन

कला-साहित्य

तुर्की के महाकवि नाज़िम हिकमत के स्मृति दिवस (3 जून) के मौक़े पर कविता : कचोटती स्वतन्त्रता / Poem : A Sad State Of Freedom / Nazim Hikmet

महान साहित्यकार मक्सिम गोर्की के स्मृति दिवस (18 जून) के अवसर पर

साथी कविता कृष्णपल्लवी की एक मौजूँ कविता – हमला हो चुका है!