क्यूबा पर तेल प्रतिबन्ध लगाने वाली साम्राज्यवादी ताक़तें मुर्दाबाद!
वेनेज़ुएला और ईरान के बाद ट्रम्प-नीत अमेरिकी साम्राज्यवादी कहर का अगला निशाना क्यूबा है!

भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी (RWPI) द्वारा जारी बयान

पश्चिम एशिया में ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका-इज़राइल द्वारा थोपे गये साम्राज्यवादी युद्ध के तेज़ होने के साथ ही अमेरिकी साम्राज्यवादी कैरेबियाई देश क्यूबा पर तेल प्रतिबन्ध लगाकर उसकी अर्थव्यवस्था को तबाह करने की कोशिश कर रहे हैं। 1959 में क्यूबा की क्रान्ति के बाद से ही क्यूबा अमेरिकी साम्राज्यवाद द्वारा लगाये गये कड़े आर्थिक प्रतिबन्धों का सामना करता रहा है, लेकिन तेल पर लगाया गया यह प्रतिबन्ध ख़ास तौर पर घातक है क्योंकि इसने देश की बिजली आपूर्ति को बाधित कर दिया है। बिजली उत्पादन के लिए क्यूबा की काफ़ी निर्भरता तेल आयात पर ही है, इसलिए अमेरिका द्वारा लगाये गये इस तेल प्रतिबन्ध के कारण गम्भीर बिजली संकट पैदा हो गया है, जो क्यूबाई लोगों के जीवन और आजीविका को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है। क्यूबा की अर्थव्यवस्था ठप्प पड़ गयी है। आज क्यूबा के भीतर एक गम्भीर मानवीय संकट पैदा हो गया है, जो अमेरिकी साम्राज्यवाद की अमानवीय कार्रवाइयों का ही नतीजा है।

क्यूबा में निरन्तर और लम्बे समय से जारी बिजली की कमी ने देश में गम्भीर खाद्य संकट पैदा कर दिया है क्योंकि खाना पकाने से लेकर, इसे लाना-ले जाना और खाद्य सुरक्षा के लिए भी बिजली पर निर्भरता है। तेल पर लगे इस अमानवीय प्रतिबन्ध ने क्यूबा की करीब एक करोड़ की आबादी को भुखमरी के कगार पर पहुँचा दिया है। बिजली की कमी के कारण अस्पतालों में भी ज़्यादातर काम ठप्प पड़ गये हैं। तेल पर लगाया गया यह प्रतिबन्ध देश को स्वास्थ्य संकट की ओर भी ले जाने का काम कर रहा है। बिजली आपूर्ति की कमी के कारण खाद्य सामग्री के बर्बाद होने के अलावा, पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है क्योंकि पानी के पम्प काम नहीं कर रहे हैं। इतना ही नहीं, हवाई ईंधन की कमी के कारण एक टापू पर बसे इस देश में बहुत-सी उड़ानें रद्द हो गयी हैं, जिससे पर्यटकों का आना प्रभावित हो रहा है। यह क्यूबा की अर्थव्यवस्था को बर्बादी की ओर ले जा सकता है, क्योंकि इस देश की पर्यटन पर निर्भरता काफ़ी अधिक है।

अमेरिकी साम्राज्यवादी ताकतों के आगे घुटने न टेकने वाली क्यूबा की जनता को इस मानवीय संकट में धकेलना ट्रम्प-नीत अमेरिकी साम्राज्यवाद की सोची-समझी साज़िश का नतीजा है। ध्यान देने की बात है कि इस साल की शुरुआत में वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति का अपहरण करने और वहाँ के तेल भण्डार पर क़ब्ज़ा करने के बाद अमेरिकी साम्राज्यवादी ताकतों ने वेनेज़ुएला से क्यूबा को तेल की बिक्री रोक दी थी। इसके साथ ही ट्रम्प प्रशासन ने उन सभी देशों से अमेरिका आने वाले उत्पादों पर भारी टैरिफ़ (टैक्स) थोप दिये जो क्यूबा को तेल बेच रहे थे। क्यूबा में जारी मानवीय संकट का मुख्य कारण ट्रम्प प्रशासन की यही नीतियाँ हैं।

तेल प्रतिबन्ध से क्यूबा की पहले से ही ख़राब अर्थव्यवस्था को और भी बड़ा झटका लगा है। कोरोना महामारी की वजह से इस देश की अर्थव्यवस्था को काफ़ी नुकसान उठाना पड़ा था क्योंकि इस दौरान पर्यटकों की संख्या में भारी कमी आयी थी। महामारी के नुकसान से क्यूबा अभी उबरा भी नहीं था कि उसे साल 2025 के अन्त में आये तूफ़ान मेलिसा की वज़ह से एक और तबाही का सामना करना पड़ा और अब उसे साम्राज्यवादी ताक़तों द्वारा तेल प्रतिबन्ध की मुसीबत झेलनी पड़ रही है। अमेरिकी साम्राज्यवादियों की अमानवीयता उस वक़्त नंगे तौर पर दिखी जब ईरान पर थोपे गये युद्ध के बीच ट्रम्प ने यह ऐलान किया कि वह “क्यूबा पर कब्ज़ा करने का गौरव” हासिल करेगा! यह बयान अमेरिकी साम्राज्यवादियों की हताशा और उनकी गिरती हुई साख को दिखाता है जिसे स्वीकार करने में वे असमर्थ हैं। यह दिखाता है कि अपने मुनाफ़े की औसत दर को बचाने के लिये साम्राज्यवाद आज मानवीयता को गड्ढे में धकेल रहा है। दुनियाभर के मेहनतकशों का एकजुट संघर्ष ही इन्सानियत को इस साम्राज्यवादी क़हर से बचा सकता है।

भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी (RWPI) अमेरिकी साम्राज्यवाद द्वारा क्यूबा की जनता को इस मानवीय संकट में धकेलने की कड़े शब्दों में भर्त्सना करती है। शुरू से ही क्यूबा की जनता साम्राज्यवादी ताकतों के ख़िलाफ़ संघर्ष में डटी रही है। साथ ही, हम यह भूल नहीं सकते हैं कि संकट के दौर में क्यूबा ने अपने डॉक्टरों व मेडिकल सहायता के ज़रिये दुनियाभर को मदद पहुँचायी है। इस वक़्त क्यूबा में स्थिति गम्भीर है इसलिए दुनियाभर के मेहनतकशों को क्यूबा की जनता के समर्थन में साथ खड़े होना चाहिए। भारत की जनता की तरफ़ से हम यह माँग करते हैं कि मोदी सरकार ट्रम्प प्रशासन पर दबाव बनाये और क्यूबा के ख़िलाफ़ अमानवीय तेल प्रतिबन्ध हटाने के लिये त्वरित क़दम उठाये। हम यह भी माँग करते है कि क्यूबा की जनता को इस खाद्य, जल और स्वास्थ्य संकट से उबरने के लिए मानवीय मदद पहुँचायी जाये।

 

मज़दूर बिगुल, मार्च 2026