देश भर में “हिन्दू” सम्मेलनों एवं यात्राओं में अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी भारतीय फ़ासीवाद के ‘नीचे से उठते चक्रवात’ का जीता-जागता उदाहरण
इन सम्मेलनों और यात्राओं में ऐसे भाषण दिये जाते हैं जो सीधे तौर पर संवैधानिक मानकों और न्यायिक धाराओं के खिलाफ़ जाते है। लेकिन बिरले ही हम पाते हैं कि ऐसे किसी व्यक्ति पर कोई क़ानूनी कार्रवाई हुई हो। यह यही दर्शाता है कि आज के हिन्दुत्व फ़ासीवादी ताक़तों ने ‘अन्दर से’ सत्ता के अलग-अलग निकायों पर क़ब्ज़ा किया है और इनलिए इनकी गुण्डा वाहिनियों को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। फ़ासीवादी सत्ता भी इन संघी गुण्डा वाहिनियों के ज़रिये ही समाज में साम्प्रदायिक ज़हर बेहद बेशर्मी से फैलाने का प्रयास करती है। सत्ता की शह के दम पर ही ये हिंदुत्ववादी भाषणों और नारों से आगे बढ़कर दुकानों में घुस-घुसकर मुसलमान दुकानदारों के साथ बदतमीज़ी व हिंसा जैसे कुकृत्य कर पाते हैं। फ़ासीवादी सत्ता की ताक़त ही इन्हें वह कूवत देती है जिसके दम पर ये गुण्डे राह चलते मुसलमानों से जबरन ‘वन्दे मातरम’ बुलवाते हैं, कश्मीरी शॉल बेचने वालों को कश्मीरी बोलने पर उत्तराखण्ड में पीट-पीटकर अधमरा कर देते हैं और आवामी एकता की मिसाल देने वाले कोटद्वार के दीपक के घर के बाहर 150-200 की भीड़ लाकर साम्प्रदायिक और उन्मादी नारेबाज़ी करते हैं।













