पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेन्दु अधिकारी द्वारा एसआईआर और जनगणना को जोड़े जाने का फ़ासीवादी बयान और उसके निहितार्थ
एसआईआर के बाद बंगाल में जिन 27 लाख लोगों का नाम न्यायिक निर्णयन के बाद हटाया गया है, उनमें मुसलमान ज़्यादा हो सकते हैं, लेकिन हिंदुओं की तादाद भी अच्छी-ख़ासी है! असल में न तो हिंदुओं के दुश्मन मुसलमान हैं, न ही मुसलमानों के दुश्मन हिन्दू हैं! बल्कि इन दोनों ही धर्मों से आने वाली मेहनतकश आवाम के आज सबसे बड़े दुश्मन संघ परिवार और भाजपा के दंगाई और फ़सादी हैं। इसलिए आज जब जनगणना और एसआईआर के बारे में सुवेन्दु अधिकारी ऐसी बातें बोल रहे हैं, तो उसे हमें हल्के में नहीं लेते हुए उसकी पुरज़ोर मुख़ालिफ़त करनी चाहिए। दूसरे, हम मेहनतकश लोगों को आपस में न बँटते हुए नागरिकता संशोधन क़ानून 2019 और एसआईआर जैसी फ़ासीवादी कवायदों को फ़ौरन रद्द किये जाने की माँग ज़ोर-शोर से उठानी चाहिए।


















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