कुत्ते और भेड़िये, और हमारी फ़ैक्टरी के सुपरवाइज़र
दिव्या, एक हौज़री मज़दूर, लुधियाना
मैंने कुत्तों और भेड़ियों की उपमाओं से नवाज़े जाते
इन्सानों के बारे में पढ़ा है
अक्सर सुना भी है
मसलन
“कुत्ते की तरह भौंक रहा था”
“साला! पूरा भेड़िया है”
लेकिन मैंने इनको पाया अपनी फ़ैक्टरी में
मसलन कि मेरे सुपरवाइज़र
हाँ तो, मैं उन कुत्तों और भेड़ियों की बात कर रही हूँ
जो हमारी फ़ैक्टरी के सुपरवाइज़र हैं
जो बात-बेबात भौंकते हैं, दाँत चियारते हुए गुर्राते हैं
मसलन
एक कुत्ता सुपरवाइज़र ने
अपनी माँ समान औरत को कहाः
“ऐ हरामी क्या कर रही है
बड़ी हरामख़ोर है,
कामचोर कहीं की
मुफ्त में तनख़्वाह ले जायेगी!”
एक दिलफेंक कुत्ता सुपरवाइज़र ने
16-17 साल की लड़की को कहाः
ऐ मादर… क्या कर दिया तूने मशीन में?”
जब लड़की ने कहा
“मास्टरजी गाली क्यों देते हो!”
कुत्ता सुपरवाइज़र बोला
“तुझे गाली दूँगा, तो दिल किसे दूँगा, मेरी फुलझड़ी!!”
एक दिन एक भेड़िया सुपरवाइज़र ने एक लड़के को एक घण्टे तक
पेशाब करने ही नहीं जाने दिया, लगातार अपने दाँत चियारता रहा
“कहाँ जाता है बे…
नहीं जायेगा…, कहीं नहीं जायेगा…
साला पेशाब करने जायेगा…
लाइन क्या तेरा बाप
आगे बढ़ायेगा…”
इन कुत्ता और भेड़िया सुपरवाइज़रों के तमाम
मसलन मेरे ज़हन में दर्ज हैं
मैं इन सुपरवाइज़रों की कुत्ता-वृत्ति और भेड़िया-वृत्ति को पता नहीं
शब्दों में बाँध भी पा रही हूँ
कि नहीं
इनकी भौं-भौं और इनकी गुर्र-गुर्र
इनका विमानवीकरण
इनके दाँतों और नाख़ूनों में लगा
हमारी दम तोड़ती इच्छाओं और स्वाभिमान का ख़ून और ख़ाल
मज़दूर बिगुल, नवम्बर 2013
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