हड़ताल दूसरे दिन भी जारी है।
होण्‍डा के अस्थायी मज़दूरों ने संघर्ष का बिगुल फूँका।

होण्‍डा प्रबन्धन आन्दोलन को दबाने के लिए पुलिस-प्रशासन का सहारा ले रहा है।

 

गुरुग्राम के मानेसर स्थित होंडा कम्पनी में अस्थायी ठेका मज़दूरों ने शोषण के ख़िलाफ़ संघर्ष का बिगुल बजा दिया है। 2 अप्रैैल को सैकड़ों मज़दूर हड़ताल पर बैठकर प्रबंधन की मज़दूर-विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं। मज़दूर लम्बे समय से वेतन बढ़ोतरी की माँग कर रहे थे, लेकिन प्रबंधन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। हड़ताल शुरू होते ही प्रबंधन द्वारा पुलिस-प्रशासन के ज़रिये मज़दूरों की आवाज़ दबाने की कोशिश की जा रही है। फैक्ट्री गेट के बाहर मज़दूरों का धरना जारी है और उन्होंने साफ़ कर दिया है कि माँगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी।
बिगुल मज़दूर दस्ता ने हड़ताल स्थल पर मज़दूरों के साथ एकजुटता दिखाई और बताया कि ऑटो सेक्टर के अन्य अस्थायी मज़दूरों को भी चार लेबर कोड्स के ख़िलाफ़ संघर्ष को अपना मुद्दा समझना चाहिए। पहले क़ानून पूरी तरह लागू नहीं होते थे, लेकिन संगठित संघर्ष के ज़रिये उन्हें लागू करवाने की सम्भावना रहती थी। अब नये श्रम क़ानूनों के तहत यह रास्ता भी कमज़ोर किया जा रहा है, जिससे मज़दूरों के अधिकार और अधिक असुरक्षित हो रहे हैं।
मज़दूर साियों ने बताया कि वे पिछले 5 से 10 वर्षों से काम कर रहे हैं, फिर भी उनकी तनख़्वाह मात्र 10 हज़ार रुपये है, जो साफ़ तौर पर शोषण को दर्शाती है। गैस की किल्लत और बढ़ती महँगाई के बीच गुरुग्राम जैसे महँगे शहर में इस वेतन पर गुज़ारा करना बेहद मुश्किल है।
मज़दूरों की माँगें पूरी तरह जायज़ हैं—न्यायपूर्ण वेतन, बेहतर कार्य-परिस्थितियाँ और ठेका प्रथा का अंत। यह संघर्ष केवल होंडा के मज़दूरों का नहीं, बल्कि पूरे मज़दूर वर्ग का है। ठेका प्रथा के ज़रिये जारी शोषण के ख़िलाफ़ सभी मज़दूरों को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।
 

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