29 मार्च, ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश।
रविवार की सुबह बिगुल मज़दूर दस्ता के कार्यकर्ताओं ने पवन एन्क्लेव काॅलोनी में डोर टू डोर मज़दूर बिगुल अख़बार का प्रचार अभियान चलाया। वर्तमान समय में चल रहे अमेरिकी-इज़रायली गठजोड़ द्वारा ईरान पर हमला करने से और भारत सरकार द्वारा इस पर ठोस योजना न लेने की वजह से भारत के विभिन्न राज्यों में रसोई गैस की किल्लत और महॅंगाई की मार बढ़ गयी है जिसका सबसे ज्यादा प्रभाव मेहनतकश वर्ग को झेलना पड़ रहा है। कई जगह हालात इतने गम्भीर हैं कि लोगों को वापस अपने गाँव की ओर लौटना पड़ रहा है। कोरोना जैसे हालात होने की सम्भावना बन रही है। वैसे हमारे देश के प्रधानमंत्री ने पहले ही चेता दिया है कि कोरोना जैसे हालत के लिए हमें तैयार रहना चाहिए। और कोरोना के समय की स्थिति कितनी भयानक थी वह कौन भूल सकता है!
लेकिन क्या मजाल जो देश की गोदी मीडिया इन ख़बरों को दिखा दे! अभी नोएडा के सेक्टर चार में बिजली मीटर बनाने वाली कम्पनी में भयंकर आग लग गयी थी जिसमें काफ़ी मज़दूर घायल हुए थे तथा एक मज़दूर की मौत हुई थी, लेकिन किसी भी मुख्य धारा की मीडिया चैनल ने कोई ख़बर नहीं चलायी। ऐसे तमाम मसले जो मज़दूरों के जीवन से जुड़े हुए हैं उनकी किसी चैनल या अख़बार में चर्चा नहीं होती। मज़दूरों के जीवन के रोज़मर्रा की समस्याओं पर मीडिया में कहीं कोई चर्चा नहीं होती। ऐसे में यह बहुत ज़रूरी हो जाता है कि मज़दूर वर्ग अपना वैकल्पिक मिडिया तन्त्र खड़ा करे। मज़दूर बिगुल मेहनतकश वर्ग का क्रान्तिकारी अख़बार है जो उन्हें अपने अधिकार से परिचित करवाता है,अतीत के शानदार संघर्षों की याददिहानी करवाता है और भविष्य के संघर्षों के लिए मार्गदर्शक का काम करता है।
अभियान के दौरान काफ़ी लोगों ने अख़बार लिया और आर्थिक सहयोग भी किया।













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