“माओवाद” से लड़ने के नाम पर राजनीतिक कार्यकर्ताओं और आम आदिवासियों की न्यायेतर हत्याएँ बन्द करो
भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी (RWPI) की ओर से जारी
भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी (RWPI) आन्ध्र प्रदेश पुलिस द्वारा सीपीआई (माओवादी) के नेतृत्वकारी सदस्य मादवी हिडमा और उनके छह साथियों की हत्या की पुरज़ोर मुख़ालफ़त करती है!
‘ऑपरेशन कगार’ और “माओवाद” से लड़ने के नाम पर राजनीतिक कार्यकर्ताओं और आम आदिवासियों की न्यायेतर हत्याएँ और मुठभेड़ करना फ़ासीवादी मोदी सरकार तत्काल बन्द करे!
विगत 18 नवम्बर को आन्ध्र प्रदेश में सीपीआई (माओवादी) के शीर्ष नेता मादवी हिडमा और उनके छः साथियों की सुरक्षा बलों द्वारा हत्या कर दी गयी। उनके शरीर पर मौजूद निशानों से यह साफ़ है कि उनकी हत्या से पहले उनके साथ अमानवीय बर्बरता की गयी थी। हिडमा और उनके साथियों को कुछ दिनों पहले आन्ध्र प्रदेश में गिरफ़्तार किया गया था और मारेडुमिल्ली जंगलों में ले जाकर उनका फ़र्ज़ी एनकाउण्टर (क़त्ल) कर दिया गया।
ज्ञात हो कि इससे पहले सीपीआई (माओवादी) के महासचिव एन. केशव राव उर्फ बसवराजू समेत लगभग 264 माओवादियों की इसी प्रकार की न्यायेतर हत्याएँ इस साल मोदी-शाह सरकार “उग्रवाद-विरोधी ऑपरेशन” के नाम पर पहले ही अंजाम दी चुकी हैं।
फ़ासीवादी मोदी सरकार द्वारा की जा रही ये हत्याएँ एक बार फिर उसके जन-विरोधी और पूँजी-परस्त चरित्र को उजागर करती हैं। ‘‘माओवादियों’’ से लड़ने के नाम पर मोदी-शाह सरकार द्वारा शुरू किया गया ‘ऑपरेशन कगार’ वास्तव में भारतीय तथा विदेशी पूँजी द्वारा मध्य भारत के खनिज-समृद्ध क्षेत्रों के शोषण व लूट के लिए रास्ता तैयार करने का ऑपरेशन है। माओवादियों और आम आदिवासियों की ये न्यायेतर हत्याएँ इन्हीं पूँजी-परस्त और जनविरोधी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए की गयी हैं।
ग़ौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में सीपीआई (माओवादी) के शान्तिवार्ता के प्रस्ताव के बावजूद मोदी सरकार अपने राजनीतिक विरोधियों का क़त्लेआम कर रही है। अन्तरराष्ट्रीय क़ानूनों और परम्पराओं के अनुसार भी लोकतांत्रिक आधार पर बनी किसी भी सरकार को हिंसा और दमन के दुष्चक्र को समाप्त करने के इस प्रस्ताव को स्वीकार करना चाहिए था। लेकिन ‘ऑपरेशन कगार’ का जारी रहना यह दिखाता है कि मोदी सरकार का इरादा उस क्षेत्र में लोकतांत्रिक तरीक़े से शान्ति बहाल करना नहीं बल्कि उस समूचे क्षेत्र में राजनीतिक विरोधियों का सफ़ाया करके उसे खाली कराने का है ताकि आम तौर पर पूँजी और ख़ास तौर बड़े पूँजीपतियों के हितों को साधा जा सके।
दरअसल मोदी सरकार द्वारा किया जा रहा राजकीय दमन और अंजाम दी जा रही ये ठण्डी हत्याएँ न केवल उसके जनविरोधी फ़ासीवादी चरित्र को उजागर करने का काम करती हैं बल्कि यह भी साबित करती हैं कि क्यों भाजपा आज के वक़्त में भारत के पूँजीपति वर्ग की सबसे चहेती पार्टी है!
भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी (RWPI) मोदी सरकार द्वारा जारी सीपीआई (माओवादी) के नेतृत्व और आम कार्यकर्ताओं की हत्याओं की भर्त्सना करती है और माँग करती है कि इन तमाम हत्याओं की उच्च-स्तरीय न्यायिक जाँच हो। साथ ही ‘ऑपरेशन कगार’ समेत तमाम तथाकथित “उग्रवाद-विरोधी ऑपरेशनों” को तत्काल बन्द किया जाये। इसके अलावा मध्य भारत समेत पूरे भारत में लगाये जाने वाले आपवादिक क़ानूनों को तुरन्त भंग किया जाये।
मज़दूर बिगुल, नवम्बर 2025














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