देश के मज़दूरों से अलग नहीं है पानीपत के मज़दूरों के हालात!
जग्गीलाल,
वैल्डर मिस्त्री,
पानीपत, हरियाणा
मेरा नाम जग्गीलाल है, उम्र 42 साल तथा मूल रूप से मैं उत्तर प्रदेश ज़िला देवरिया का रहने वाला हूँ। पिछले 15 साल से मैं पानीपत में काम कर रहा हूँ। अलग-अलग जगह काम करने के बाद फ़िलहाल मैं तौलिया फ़ैक्टरी में वैल्डर मिस्त्री (फिटर) के तौर पर काम कर रहा हूँ। यहाँ काम करते हुए मुझे 6 साल का समय हो चुका है, किन्तु 12 घण्टे की शिफ्ट के हिसाब से 6,300 रुपये महावार वेतन मिलता है। फ़ैक्टरी में करीब 1,000 मज़दूर काम करते हैं जिनमें से गिने-चुनें स्थायी मज़दूरों को ही पीएफ़, ईएसआई जैसी सुविधाएँ मिलती हैं। फ़ैक्टरी में काम की कोई तसल्ली नहीं है, मालिक जब चाहे काम से निकाल सकता है। जिस दिन मालिक चाहता है उस दिन काम पर नहीं रखा जाता और उस दिन की तनख़्वाह काट ली जाती है। फ़ैक्टरी रिहाइश से करीब 15 किलोमीटर दूर है, आने-जाने की व्यवस्था ख़ुद ही करनी पड़ती है थोड़ा सा लेट होने पर आधे दिन की तनख़्वाह काट ली जाती है। पिछले दिनों ही अलग-अलग करके करीब सौ मज़दूरों की छुट्टी कर दी गयी थी। बच्चों से भी फ़ैक्टरी में काम करवाया जाता है। जब कभी इंस्पेक्शन होती है प्लाण्ट बन्द दिखाकर बच्चों को हटा दिया जाता है और काम फिर से चालू हो जाता है। यह हाल केवल हमारी फ़ैक्टरी का ही नहीं है बल्कि पानीपत भर के पूरे औद्योगिक इलाक़े के ऐसे ही हालात हैं। कुछ धन्धेबाज़ यूनियनें काम करती हैं लेकिन मज़दूरों की कोई व्यापक एकजुटता नहीं है। मुझे आधी से ज़्यादा उम्र काम करते हो गयी, अभी तक सिर पर अपनी छत नहीं है। किराये के मकान में किसी तरह रहना पड़ता है। मैंने देश के कई हिस्सों में देखा है कि मज़दूर कहीं भी अच्छे हालात में नहीं हैं। और आज तो लगातार बढ़ती महँगाई के समय में बच्चों का पेट भरना भी मुश्किल होता जा रहा है। प्यारे मज़दूर भाइयो, मैं इस अख़बार के माध्यम से यही कहना चाहूँगा कि हिम्मत और हौसला बनाये रखिये व अपनी एकजुटता कायम कीजिये। क्योंकि अपनी एकजुटता के दम पर ही हम लुटेरे मालिकों व उनकी सेवा करने वाली सरकारों को झुका सकते हैं।
मज़दूर बिगुल, मई 2015













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