अन्तरराष्ट्रीय स्त्री दिवस (8 मार्च) के अवसर पर
रुको, ठहरो और सुनो
हमारी शक्ति की आवाज़
हृदय की मौन फकार,
हम सक्षम हैं, सक्षम हैं, सक्षम हैं।
कोटि-कोटि हाथों की ताक़त में
जोड़ दो अपनी ताक़त
आने दो ज्वार बदलाव का
बढ़ती चलो, आगे
नये वक़्त, नयी जगह
अपने ही बनाये नये युग की ओर।
खिलने दो क्रोध के फूल
बिखरने दो अंगारे
कुचल दो सख़्ती से उस अन्याय को
भोगती आयी हैं जिसे सब औरतें
और दलित वर्ग सारे।
मज़दूर बिगुल, मार्च 2011













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