(मज़दूर बिगुल के मार्च 2025 अंक में प्रकाशित लेख। अंक की पीडीएफ़ फ़ाइल डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें और अलग-अलग लेखों-ख़बरों आदि को यूनिकोड फ़ॉर्मेट में पढ़ने के लिए उनके शीर्षक पर क्लिक करें)

 

 

सम्पादकीय

शहीदे-आज़म भगतसिंह आज देश के मज़दूरों, ग़रीब किसानों और मेहनतकशों को क्या सन्देश दे रहे हैं?

श्रम कानून

घरेलू कामगार को मज़दूरों का दर्जा देना होगा! / अदिति

फासीवाद / साम्‍प्रदायिकता

छावा : फ़ासीवादी भोंपू से निकली एक और प्रोपेगैण्डा फ़िल्म / सूरज

दिव्य महाकुम्भ में भव्य भ्रष्टाचार / चन्द्रप्रकाश

विशेष लेख / रिपोर्ट

अन्तरराष्ट्रीय कामगार स्त्री दिवस के अवसर पर आँगनवाड़ीकर्मियों ने मनाया ‘संघर्ष का उत्सव’! / वृषाली

मज़दूर आंदोलन की समस्याएं

केरल में ग़द्दार वामपन्थ के कारनामे – ‘धन्धा करने की आसानी’ को बढ़ावा, आशा कार्यकर्ताओं का दमन, अवसरवादियों का स्वागत / बिपिन बालाराम

समाज

स्त्री मुक्ति आन्दोलन को सुधारवाद, संशोधनवाद, नारीवाद और एनजीओपन्थ की राजनीति से बाहर लाना होगा / अंजलि

बुर्जुआ जनवाद – दमन तंत्र, पुलिस, न्यायपालिका

ऑटोमोबाइल सेक्टर के अस्थायी मज़दूरों के सम्मेलन को पुलिस द्वारा बाधित करने की कोशिश!

शिक्षा और रोजगार

तेलंगाना में जातिगत जनगणना : युवाओं को रोज़गार देने में फिसड्डी रेवन्त रेड्डी सरकार का नया शिगूफ़ा / आनन्‍द

पर्यावरण / विज्ञान

पर्यावरणीय विनाश के चलते सिमटता वसन्त / सनी

लेखमाला

क्रान्तिकारी मज़दूर शिक्षणमाला – 24 : मार्क्सवादी राजनीतिक अर्थशास्त्र के सिद्धान्त – खण्ड-2 : अध्याय – 1 पूँजी के परिपथ (सर्किट) / अभिनव

मज़दूर वर्ग की पार्टी कैसी हो? (दसवीं किश्त) / सनी

महान जननायक

रोज़ा लक्ज़मबर्ग की याद में / अमित

शहीद भगतसिंह – श्रमिक क्रान्ति निश्‍चय ही साम्राज्‍यवाद-पूँजीवाद का नाश करेगी और सर्वहारा अधिनायकत्‍व की स्‍थापना करेगी

संघर्षरत जनता

केरल की आशाकर्मियों का संघर्ष ज़िन्दाबाद! नकली मज़दूर पार्टी सीपीएम और इसकी ट्रेड यूनियन सीटू का दोमुहाँपन एक बार फिर उजागर!! / वृषाली

औद्योगिक दुर्घटनाएं

मज़दूरों की चीख़ों और मौतों पर टिका पूँजीवाद का निर्माण उद्योग / प्रेमप्रकाश

गतिविधि रिपोर्ट

कुसुमपुर पहाड़ी में अन्तरराष्ट्रीय स्त्री दिवस पर सांस्कृतिक संध्या : एक शाम संघर्षों के नाम

मनरेगा स्त्री मज़दूरों का नारा : पूरे साल काम दो! काम के पूरे दाम दो!! काम नहीं तो बेरोज़गारी भत्ता दो!

भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु के 94वें शहादत दिवस (23 मार्च) पर दिल्ली के शाहबाद डेरी में भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी की ओर से लगा ‘शहीद मेला’

कला-साहित्य

गोर्की के उपन्‍यास ‘माँ’ का एक अंश : एक समाजवादी का अदालत में बयान

कविता – नयी सदी में भगतसिंह की स्मृति / शशि प्रकाश

आपस की बात

अपनी ज़िन्दगी बदलने के लिए बम्बइया मसाला फ़िल्मों की नही बल्कि मज़दूरों के संघर्षों के गौरवशाली इतिहास की जानकारी ज़रूरी है / राजकुमार, लखनऊ