जनता को तोपें और बमवर्षक नहीं बल्कि रोटी, रोज़गार, सेहत व शिक्षा जैसी बुनियादी ज़रूरतें चाहिए
सरकार देश के लोगों से डरती है और उन पर दमन बढ़ाने, उनके हक़ और गुस्से की हर आवाज़ को दबाने के लिए ही फ़ौजी मशीनरी को और ज़्यादा आधुनिक, और ज़्यादा दैत्याकार तथा और ज़्यादा मज़बूत कर रही है। कारण भी साफ़ है कि संसार पूँजीवादी ढाँचे के आर्थिक संकट की लपेट में आये भारतीय अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए भारत का पूँजीपति वर्ग मेहनतकश आबादी की लूट बढ़ाकर, उनको दी जाती जन-सुविधाएँ छीनकर अपनी तिजोरियों में डालना चाहती है। इसी लिए उन्होंने गुज़रात दंगों के नायक मोदी को अपना प्रतिनिधि बनाया है, क्योंकि लोगों को और ज़्यादा लूटने-पीटने के लिए उनको राहुल (और कांग्रेस) जैसा नाजुक-कोमल-सा प्रतिनिधि नहीं चाहिए, बल्कि ज़्यादा अत्याचारी, बदमाश और बेरहम प्रतिनिधि चाहिए जोकि मोदी है। मोदी ने आते ही लोगों के मुँह से निवाले छीनकर पूँजीपति वर्ग को परोसने शुरू कर दिये हैं, विदेशी निवेशकों को बुलाना शुरू कर दिया है, लोगों को दी जाती सहूलियतें और अधिकारों को छीनना शुरू कर दिया है और ज़रूरत पड़ने पर लोगों पर डण्डा चलाना भी शुरू कर दिया है। लोगों के बढ़ते गुस्से और बेचैनी के लिए मोदी अपना डण्डा और मज़बूत करना चाहता है।























Recent Comments