नोटबन्दी और बैंकों के ‘‘बुरे क़र्ज़’’
काले धन पर सर्जिकल स्ट्राइक का हवाला देकर सरकार की असली मंशा काला धन पर हमला नहीं बल्कि पूँजीपतियों की सेवा करना है। यहाँ एक और तथ्य का जि़क्र करते हुए चलें। नोटबन्दी के फै़सले के बाद बैंकों ने ब्याज़ दरें घटा दी हैं। इससे ज़ाहिरा तौर पर जनता को तो कोई लाभ नहीं होगा पर 7.3 लाख करोड़ का क़र्ज़ दबाये बैठे 10 बड़े ऋणग्रस्त कॉरपोरेट घरानों के लिए तो यह क़दम सोने पर सुहागा होने जैसा है। भई साफ़़ है, यह जनता नहीं पूँजीपतियों की सरकार है।






















Recent Comments