लेनिन : टेलर प्रणाली – मशीन द्वारा आदमी को दास बनाया जाना
श्रम की उत्पादनशीलता में कैसी प्रकाण्ड उपलब्धि है! लेकिन मज़दूर का वेतन चौगुना नहीं, बल्कि अधिक से अधिक डेढ़ गुना ही बढ़ाया जाता है और वह भी सिर्फ थोड़े समय के लिए । ज्योंही मज़दूर नई प्रणाली के आदी हो जाते हैं, त्योंही उनका वेतन घटाकर पहले के स्तर पर पहुँचा दिया जाता है । पूँजीपति प्रकाण्ड मुनाफ़ा हासिल करता है, लेकिन मज़दूर पहले की अपेक्षा चौगुनी अधिक मशक्कत करते हैं और पहले की अपेक्षा चौगुनी तेज़ी से अपने स्नायु–तन्तुओं तथा मांसपेशियों का क्षय करते हैं । नए नियुक्त हुए मज़दूरों को कारख़ाने के सिनेमा में ले जाया जाता है, जहाँ उसे काम की “आदर्श” पूर्ति प्रदर्शित की जाती है और उसे उस आदर्श के “स्तर तक पहुँचने” को विवश किया जाता है । एक हफ्ते बाद उसे सिनेमा में खुद उसका काम दिखाया जाता है और “आदर्श” के साथ उसकी तुलना की जाती है ।






















