(बिगुल के नवम्‍बर-दिसम्‍बर 2000 अंक में प्रकाशित लेख। अंक की पीडीएफ फाइल डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें और अलग-अलग लेखों-खबरों आदि को यूनिकोड फॉर्मेट में पढ़ने के लिए उनके शीर्षक पर क्लिक करें)

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सम्‍पादकीय

पर्यावरण के नाम पर 25 लाख से भी अधिक मज़दूरों की रोजी छीन रही है सरकार

अर्थनीति : राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

विदेशी सलाहकार कम्‍पनी की रिपोर्ट : सरकारी बीमा उद्योग को ठेठ नफा-नुकसान पर चलाओ, मोटे असामियों पर नजरें गड़ाओ, आम जनता को लात लगाओ / ललित सती

उदारीकरण-निजीकरण का एक अनिवार्य नतीजा : देशी-विदेशी बड़ी पूँजी का बढ़ता एकाधिकार और तबाह होते लघु उद्योग / अरविन्‍द सिंह

और कितने कड़े कदम बाकी हैं प्रधानमंत्री महोदय

उत्‍तरांचल राज्‍य का गठन : सिर मुडाते ही ओले पडे

बाजार व्‍यवस्‍था का खेल / जनता से लूट, लुटेरों को खैरात

श्रम कानून

“स्‍वैच्छिक” अर्थात “जबरिया”

संघर्षरत जनता

भूमण्‍डलीकरण के खिलाफ पूरी दुनिया में तीखे हो रहे हैं मज़दूर संघर्ष / सुखदेव

ए.एस.पी. गजरौला का मज़दूर आन्‍दोलन निर्णायक मुकाम पर

गजरौला क्षेत्र के अन्‍य कारखानों में भी जारी है सुगबुगाहट

बहस

भारत में क्रान्तिकारी आन्‍दोलन की समस्‍याएं : एक बहस (आठवीं किश्‍त) – एकताबद्ध क्रान्तिकारी कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के निर्माण की समस्‍याएं / सियासरण शर्मा

महान शिक्षकों की कलम से

मज़दूर वर्ग का अंतिम लक्ष्‍य – राजनीतिक सत्‍ता / कार्ल मार्क्‍स

कम्‍यनिस्‍ट समाज के बारे में / फ्रेडरिक  एंगेल्‍स

बुर्जुआ जनवाद – दमन तंत्र, पुलिस, न्यायपालिका

एक और पुलिसिया ताण्‍डव / ऐ जुल्‍म के मारो लब खोलो चुप रहने वालो चुप कब तक

पंजाब में प्रवासी मज़दूरों पर बढ़ रहे हमले

लेखमाला

चीन की नवजनवादी क्रान्ति के अर्द्धशतीवर्ष के अवसर पर – जनमुक्ति की अमर गाथा : चीनी क्रान्ति की सचित्र कथा (भाग नौ)

महान मज़दूर नेता

स्‍तालिन के जन्‍मदिवस के अवसर पर : स्‍तालिन क्‍या थे – महामानव या भयावह / सुरेन्‍द्र कुमार

कारखाना इलाक़ों से

गैरकानूनी तालाबन्‍दी के बाद टेल्‍को की लखनऊ इकाई के 50 कर्मचारी बर्खास्‍त / ओमप्रकाश

होण्‍डा पावर प्रोडक्‍टस में मज़दूरों के निलम्‍बन का सवाल : जाति और क्षेत्र के संकीर्ण दायरे को तोड़ना होगा, संघर्ष को नया आयाम देना होगा

मज़दूरों की कलम से

एक कविता / लावण्‍य पन्‍त, मज़दूर, ए.एस.पी. गजरौला