आपस की बात
वजीरपुर के मज़दूरों के संघर्ष के बारे में
बाबूराम, मजदूर, वजीरपुर इंडस्ट्रियल एरिया
मजदूर साथियो, मेरा नाम बाबूराम हैं, मैं गरम मशीन का ओपेरटर हूँ। मैं वजीरपुर इंडस्ट्रियल एरिया में रहता हूँ। साथियों, मैं वजीरपुर इंडस्ट्रियल एरिया के मजदूरों के हालात के बारे में लिख रहा हूँ। साथियो, यहाँ हाल बहुत बुरा है। यहाँ मजदूरों से 12-12 घण्टे काम करवाया जाता हैं। यहाँ पर कोई भी श्रम क़ानून लागू नहीं है। यहाँ के मजदूरों का बहुत बुरा हाल है।मेरे प्यारे मजदूर साथियों सन 2012 में हम सब लोगों ने मिलकर अपने हकों के लिए लड़ने का फैसला लिया। और अपनी हड़ताल के बाद बुधवार की छुट्टी और वेतन में 1000 रुपए की बढ़ोतरी की अपनी मांगें मालिकों से मनवायी। सन 2013 में भी हम सब मजदूर भाइयों ने मिलकर एक बार फिर हड़ताल की और इस बार हमने 1500 रुपए वेतन में बढ़ोतरी और इ.एस.आई. की मांगो पर जीत हासिल की। जब सन 2014 में इलाके के मालिकों को सूचित किया गया कि उनके वायदे के मुताबिक अगर वह लोग हमारे वेतन में अप्रैल से 1500 रुपए बढ़ा कर नहीं देते हैं तो हम सभी मजदूर फि़र से एक बार हड़ताल पर बैठेंगे। उस समय मालिकों ने यह जवाब दिया की वह लोग सैलरी बढ़ा कर नहीं देंगे। हम सभी मजदूर साथियों ने एक महीने तक इंतजार किया और तब भी मालिकों के रुख में कोई बदलाव नहीं आने के कारण, हम लोगों ने 6 जून,2014 से इलाके में हड़ताल की कॉल दी। यह हड़ताल तकरीबन 32 दिन तक चली और सभी गरम रोला फ़ैक्टरियों के मालिकों को नाको चने चबाने पड़े। हम सब मजदूर साथियों की एकता के कारण मालिक और उनके गुण्डे भी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सके। पुलिस प्रशासन को भी हमारी एकता के सामने घुटने टेकने पड़े। साथियों अपनी इस हड़ताल को हम मजदूरों ने जुझारू रूप से लड़ा और अपनी कई मांगे मनवाई। मेरे प्यारे मजदूर साथियों मैं इस पत्र को इस आशा के साथ लिख रहा हूँ कि आप सभी को अपने मजदूर भाइयों के संघर्ष के बारे में पता चले और आप भी अपनी मजदूर एकता पर गर्व करें।
मज़दूर बिगुल, अक्टूबर 2014













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