(बिगुल के सितम्‍बर 2009 अंक में प्रकाशित लेख। अंक की पीडीएफ फाइल डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें और अलग-अलग लेखों-खबरों आदि को यूनिकोड फॉर्मेट में पढ़ने के लिए उनके शीर्षक पर क्लिक करें)

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सम्पादकीय

ग़रीबों पर मन्दी का कहर अभी जारी रहेगा – पूँजीवाद के विनाशकारी संकट से उबरने के आसार नहीं! इस व्यवस्था को क़ब्र में पहुँचाकर ही इन संकटों से निजात मिलेगी!!

संघर्षरत जनता

टोरण्टो के मज़दूरों की शानदार जीत / लखविन्दर

बरगदवा, गोरखपुर में दो कारखानों के मज़दूरों का डेढ़ माह से जारी जुझारू आन्दोलन निर्णायक मुकाम पर

महान शिक्षकों की कलम से

मज़दूर वर्ग का नारा होना चाहिए – “मज़दूरी की व्यवस्था का नाश हो!” / कार्ल मार्क्‍स

विरासत

भगतसिंह के जन्मदिवस (28 सितम्बर) के अवसर पर – अदालत में दिये गये बयान का एक हिस्‍सा

बुर्जुआ जनवाद – दमन तंत्र, पुलिस, न्यायपालिका

फ़र्ज़ी मुठभेड़ों, पुलिस हिरासत में प्रतिदिन 4 बेकसूर मारे जाते हैं – दमनकारी, शोषक, जनविरोधी सरकार को ऐसी ही सेना, ऐसी पुलिस चाहिए!! / जयपुष्‍प

जजों की सम्पत्ति सार्वजनिक करने या न करने के बारे में – परदे में रहने दो, परदा ना उठाओ… / नमिता

भारत का संविधान कहता है… / आनन्‍द सिंह

बुर्जुआ जनवाद – चुनावी नौटंकी

पंजाब में भी जनता बदहाल, नेता मालामाल – विधायकों-मन्त्रियों के वेतन-भत्तों में भारी बढ़ोत्तरी की तैयारी / लखविन्‍दर

लेखमाला

अदम्‍य बोल्‍शेविक – नताशा एक संक्षिप्त जीवनी (नवीं किश्त) / एल. काताशेवा

फ़ासीवाद क्या है और इससे कैसे लड़ें? (चौथी किश्‍त) – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ : भारतीय फ़ासीवादियों की असली जन्मकुण्डली / अभिनव

बोलते आँकड़े, चीख़ती सच्चाइयाँ

एक तरफ़ भूख और अकाल – दूसरी तरफ़ गोदामों में सड़ता अनाज – यह है पूँजी की मुनाफ़ाखोर व्यवस्था की सच्चाई…

कारखाना इलाक़ों से

दिन-ब-दिन बिगड़ती लुधियाना के पावरलूम मज़दूरों की हालत / राजविन्दर

औद्योगिक दुर्घटनाएं

दिल्ली के समयपुर व बादली औद्योगिक क्षेत्र की ख़ूनी फ़ैक्ट्रियों के ख़िलाफ़ बिगुल मज़दूर दस्ता की मुहिम

कारख़ाना मालिकों की मुनाफ़े की हवस ने किया एक और शिकार / राजविन्दर

गतिविधि रिपोर्ट

कमरतोड़ महँगाई और बेहिसाब बिजली कटौती के ख़िलाफ़ धरना

दिशा छात्र संगठन-नौजवान भारत सभा ने शुरू किया ‘शहरी रोज़गार गारण्टी अभियान’

कला-साहित्य

कविता – हिटलर के तम्बू में / नागार्जुन

मज़दूरों की कलम से

गोरखपुर के संगठित मज़दूरों के नाम / टी.एम. अंसारी, लुधियाना

कविता – अब तो देसवा में फैल गईल बिमारी / सिद्धेश्वर यादव, वेल्डर, फ़ौजी कॉलोनी, शेरपुर, लुधियाना