(मज़दूर बिगुल के मार्च 2013 अंक में प्रकाशित लेख। अंक की पीडीएफ फाइल डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें और अलग-अलग लेखों-खबरों आदि को यूनिकोड फॉर्मेट में पढ़ने के लिए उनके शीर्षक पर क्लिक करें)

Thumbnail_Mazdoor-Bigul_March_2013

सम्‍पादकीय

चुनावी तैयारियों के बीच बजट का खेल – पूँजीवादी नीतियों के कारण ख़स्‍ताहाल अर्थव्‍यवस्‍था का बोझ ढोती रहेगी मेहनतकश जनता

आन्‍दोलन : समीक्षा-समाहार

दो दिनों की “राष्‍ट्रव्यापी” हड़ताल – यूनियनों के सालाना अनुष्‍ठान में मज़दूर असन्‍तोष की ‘विघ्‍न बाधा’

मारुति सुज़ुकी मज़दूर आन्दोलन के इस निर्णायक चरण में आगे बढ़ने के लिए भीतर मौजूद विजातीय रुझानों और विघटनकारी ताक़तों से छुटकारा पाना होगा / अभिनव

बुर्जुआ जनवाद – दमन तंत्र, पुलिस, न्यायपालिका

अफ़ज़ल गुरू को फाँसी: बुर्जुआ “राष्‍ट्र” के सामूहिक अन्तःकरण की तुष्टि के लिए न्याय को तिलांजलि / शिवानी

स्‍वास्‍थ्‍य

इलाज के नाम पर लोगों की जान से खेल रही हैं दवा कम्पनियाँ / मनन विज

बोलते आँकड़े, चीख़ती सच्चाइयाँ

भारत में लगातार चौड़ी होती असमानता की खाई और जनता की बर्बादी की कीमत पर हो रहे विकास पर एक नजर! / राजकुमार

लेखमाला

कैसा है यह लोकतन्त्र और यह संविधान किनकी सेवा करता है? (सत्रहवीं किश्त) – मूलभूत कर्तव्यः राज्य की विफ़लता का ठीकरा जनता पर फोड़ने की बेशर्म क़वायद / आनन्‍द सिंह

इतिहास

पेरिस कम्यून की वर्षगाँठ (18 मार्च) के अवसर पर

महान जननायक

शहीद दिवस (23 मार्च) पर भगतसिंह व उनके साथियों के विचारों और सपनों को याद करते हुए!

कारखाना इलाक़ों से

समयपुर, लिबासपुर का लेबर चौक / रामाधार, बादली

एक मेहनतकश औरत की कहानी… / शिवानन्‍द, गुड़गांव

पूँजी की ताकत के आगे हड़ताल के लिए जरूरी है वर्ग एकजुटता!

8 मार्च अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ‘‘मजदूर अधिकार रैली’’

मज़दूर बस्तियों से

भारत की ‘सिलिकन घाटी’ की चमक-दमक की ख़ातिर उजड़ा मेहनतकशों का आशियाना

कला-साहित्‍य

अन्तरराष्ट्रीय स्त्री दिवस (8 मार्च) पर एक कविता

मक्सिम गोर्की के जन्मदिवस (28 मार्च) पर – एक साहित्यिक परिचय / राजकुमार

मज़दूरों की कलम से

देशव्यापी हड़ताल किसके लिए? / आनन्‍द, गुड़गांव