बिगुल के कार्यकर्ताओं ने कहा कि, नरेन्द्र मोदी ने सत्ता में आने के बाद से ही “कारोबार की आसानी” के नाम पर पूँजीपतियों को मज़दूरों की श्रम-शक्ति लूटने की खुली छूट देने का ऐलान कर दिया था। यही कारण है कि वर्षों के वर्ग संघर्ष के बल पर मज़दूरों ने जो भी अधिकार श्रम क़ानूनों के रूप में हासिल किये थे, उसे फ़ासीवादी मोदी सरकार पूरी तरह से छीनने पर अमादा है ताकि मन्दी की मार से पूँजीपतियों के मुनाफ़े में जो भी रोड़ा है उसे हटाकर पूँजीपतियों को मज़दूरों को लूटने की खुली छूट दी जा सके। इसी मक़सद से 44 केन्द्रीय श्रम क़ानूनों को ख़त्म कर चार लेबर कोड को लागू किया गया है। कहने के लिए तो श्रम क़ानूनों को तर्कसंगत और सरल बनाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। लेकिन इसका एक ही मक़सद है, देशी-विदेशी कम्पनियों के लिए मज़दूरों के श्रम को सस्ती से सस्ती दरों पर और मनमानी शर्तों पर निचोड़ना आसान बनाना। ऐसे में आज ज़रूरी है कि मज़दूर वर्ग अपनी वर्गीय एकजुटता कायम करे और लेबर कोड के ख़िलाफ़ निर्णायक संघर्ष के लिए अनिश्चित कालीन आम हड़ताल की तैयारी करे।
बिगुल के कार्यकर्ताओं ने कहा कि, नरेन्द्र मोदी ने सत्ता में आने के बाद से ही “कारोबार की आसानी” के नाम पर पूँजीपतियों को मज़दूरों की श्रम-शक्ति लूटने की खुली छूट देने का ऐलान कर दिया था। यही कारण है कि वर्षों के वर्ग संघर्ष के बल पर मज़दूरों ने जो भी अधिकार श्रम क़ानूनों के रूप में हासिल किये थे, उसे फ़ासीवादी मोदी सरकार पूरी तरह से छीनने पर अमादा है ताकि मन्दी की मार से पूँजीपतियों के मुनाफ़े में जो भी रोड़ा है उसे हटाकर पूँजीपतियों को मज़दूरों को लूटने की खुली छूट दी जा सके। इसी मक़सद से 44 केन्द्रीय श्रम क़ानूनों को ख़त्म कर चार लेबर कोड को लागू किया गया है। कहने के लिए तो श्रम क़ानूनों को तर्कसंगत और सरल बनाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। लेकिन इसका एक ही मक़सद है, देशी-विदेशी कम्पनियों के लिए मज़दूरों के श्रम को सस्ती से सस्ती दरों पर और मनमानी शर्तों पर निचोड़ना आसान बनाना। ऐसे में आज ज़रूरी है कि मज़दूर वर्ग अपनी वर्गीय एकजुटता कायम करे और लेबर कोड के ख़िलाफ़ निर्णायक संघर्ष के लिए अनिश्चित कालीन आम हड़ताल की तैयारी करे।













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