पानीपत रिफाइनरी में श्रमिकों की हड़ताल का आज छठा दिन था। श्रमिकों ने पिछले दिनों की भाँति रिफाइनरी के गेट नम्बर चार पर सभा चलायी और रैली लेकर गेट नम्बर तीन तक आये। यहाँ पर श्रमिकों और दो यूनियन/संगठन प्रतिनिधियों (जोकि विगत बैठक में भी शामिल हुए थे) को वार्ता के लिए बुलाया गया। लेकिन उक्त यूनियन/संगठन प्रतिनिधियों ने वार्ता बैठक में शामिल होने से इन्कार कर दिया और आख़िरकार पाँच श्रमिक ही वार्ता के लिए गये। पाँचों श्रमिक वार्ता के बाद “सहमत” नज़र आये जिसमें इस बात की पूरी सम्भावना है कि इसके लिए उनपर कोई दबाव बनाया गया हो। बिगुल मज़दूर दस्ता का यह मानना है कि
सम्बन्धित यूनियन/संगठन प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए जाना चाहिए था।
सम्बन्धित यूनियन/संगठन प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए जाना चाहिए था।चूँकि होली के चलते कुछ श्रमिक गाँव चले गये हैं, श्रमिकों की अपनी कोई यूनियन या संगठन नहीं है, प्रवासी होने चलते स्थिति अरक्षित भी है तो इन सब बिन्दुओं का असर इस आन्दोलन पर भी नज़र आ रहा है। पानीपत का न्यूनतम मज़दूरी का ग्रेड जोकि पहले बी था और जिसे घटाकर सी कर दिया गया था उसे वापस पाने और न्यूनतम मज़दूरी में बढ़ोत्तरी की माँग पर पूर्ण सहमति श्रमिकों के बीच अभी नहीं बनी थी। हालाँकि बाक़ी माँगों को कागज़ पर तो मान लिया गया था लेकिन हक़ीक़त में यह कितना तब्दील होता है यह भविष्य बतायेगा।
आज यह भी देखने को मिला कि पूरे रिफाइनरी क्षेत्र में पुलिस-प्रशासन, बाउंसरों, ठेकेदारों की मौजूदगी पहले से काफी ज़्यादा थी। बिगुल मज़दूर दस्ता ने शुरू से ही पानीपत रिफाइनरी के मज़दूरों की सभी माँगों का पुरज़ोर और सक्रिय समर्थन किया है। हम रिफाइनरी प्रशासन और सरकार से माँग करते हैं कि श्रमिकों पर किसी भी तरह का दबाव न बनाया जाये और उनकी सभी माँगों का सकारात्मक तौर पर समाधान होना चाहिए। श्रमिकों पर किसी भी प्रकार की बदले की या दमनात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
मज़दूरों की वर्ग एकता – ज़िन्दाबाद !














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