7 मार्च को जींद ज़िले के सफीदों की भाट कॉलोनी में गुलाल व रंग बनाने वाली एक फैक्ट्री में भीषण आग लगने से 4 महिला मज़दूरों की दर्दनाक मौत हो गई और लगभग 20 मज़दूर गंभीर रूप से झुलस गए। बताया गया कि फैक्ट्री के मुख्य गेट पर बाहर से ताला लगा हुआ था, जिसके कारण मज़दूर समय रहते बाहर नहीं निकल सके और कई मज़दूर भीतर ही फँसकर जलते रहे। जान बचाने के लिए कुछ मज़दूरों ने छत से छलांग भी लगाई।
यह घटना कोई साधारण दुर्घटना नहीं, बल्कि हरियाणा की भाजपा सरकार की पूँजीपरस्त नीतियों और कारखानों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का परिणाम है। स्थानीय लोगों के अनुसार आग का तात्कालिक कारण शॉर्ट सर्किट हो सकता है, लेकिन असली कारण अवैध रूप से चल रही फैक्ट्री, फ़ायर सेफ़्टी की कमी, आपातकालीन निकास का अभाव और काम के दौरान गेट पर ताला लगाए जाने जैसी खतरनाक स्थितियाँ हैं। ऐसी स्थिति में सवाल उठता है कि मज़दूर आखिर कब तक पूँजीपतियों के मुनाफ़े की भट्टी में झोंके जाते रहेंगे?
देश में हर साल हज़ारों मज़दूर औद्योगिक हादसों में अपनी जान गंवाते हैं, जबकि नए लेबर कोडों ने मज़दूरों की सुरक्षा को और कमज़ोर कर दिया है। इसलिए ज़रूरी है कि मज़दूर इस शोषण और लापरवाही के खिलाफ एकजुट हों।
हमारी माँगें है:
1. दोषी मालिकों को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाए।
2. मृतक व घायल मज़दूर परिवारों को अधिकतम मुआवज़ा दिया जाए।
3. सभी फैक्ट्रियों में श्रम कानूनों और सुरक्षा इंतज़ामों को सख़्ती से लागू किया जाए।
4. हरियाणा में चल रही अवैध फैक्ट्रियों पर तत्काल कार्रवाई की जाए।
5. श्रमिक विरोधी चार लेबर कोड वापस लिए जाए।