9 मार्च। बक्सर के थर्मल पावर प्रोजेक्ट में निर्माण कार्य कर रहे मज़दूरों ने अपने हक़ की मांगों को लेकर काम बंद कर हड़ताल शुरू कर दी है। मज़दूरों का कहना है कि उन्होंने 20 फरवरी को कम्पनी प्रबन्धन को 11 सूत्री मांगों का ज्ञापन दिया था, जिसमें बोर्ड रेट के अनुसार मजदूरी और श्रमिकों की बुनियादी समस्याओं के समाधान की मांग की गई थी। उस समय कम्पनी अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
9 मार्च तक जब मजदूरों की मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो पावर मेक और एल एंड टी कंपनी के अधीन काम कर रहे मज़दूरों हड़ताल का रास्ता चुना। मज़दूरों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, वे काम पर नहीं लौटेंगे। मजदूरों ने कार्य बहिष्कार करते हुए प्लांट के अन्दर और बाहर सांकेतिक धरना दिया। अभी तक कम्पनी प्रबन्धन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
मज़दूरों की प्रमुख मांगें:
1. बोर्ड रेट और न्यूनतम मज़दूरी के अनुसार भुगतान
2. ओवरटाइम का नियमानुसार अलग से भुगतान
3. मजदूरी का समय पर भुगतान
4. कार्यस्थल पर मानक के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था
5. पीएफ और ईएसआई की नियमित कटौती
6. गेट पास नवीनीकरण के नाम पर दोबारा ज्वाइनिंग की प्रक्रिया बंद करना
7. सेवा समाप्ति के बाद मिलने वाले लाभ सुनिश्चित करना
थर्मल प्लांट के मज़दूरों की हड़ताल ने एक बार फिर देश भर के अलग-अलग थर्मल प्लांटों, रिफाइनरियों और कारखानों में मज़दूरों के आक्रोश और रोष को सामने ला दिया है। एक ओर मोदी सरकार चार लेबर कोड लागू करके मज़दूरों के बचे-खुचे श्रम अधिकारों को भी छीन रही है, वहीं दूसरी ओर मज़दूर अपने श्रम अधिकारों को लागू करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
बिगुल मज़दूर दस्ता, संघर्षरत मज़दूरों की इन हड़ताल से एकता जाहिर करता है। साथियों आज हम अपने संघर्षों को एकजुट और संगठित करना होगा। क्योंकि ज्यादातर थर्मल प्लांट, रिफाइनरी से लेकर फैक्ट्री- कारखानों में मज़दूरों की कई मांगे सांझा है।