लोकतंत्र के बारे में नेता से मज़दूर की बातचीत

– नकछेदी लाल, बादली

लोकतंत्र का हमारे लिए बस यही मतलब है
कि सुनते रहें आपके भाषण और लगाते रहें
मतपत्र पर छापा।
फिर पाँच साल तक संसद में आप लगाते रहें लोट
ऊँघते रहें और छोड़ते रहें गैस
आपके कुनबे वाले करते रहें ऐश,
दिन-दूनी रात-चौगुनी बढ़ती जाये
आपकी दौलत और आपका मोटापा।
इस लोकतंत्र में कारख़ानों में राख हो जाती है
हम मज़दूरों की जवानी
और दिप-दिप दमकता है मुफ़्तख़ोरों का बुढ़ापा।
आप तो हैं उन्हीं के टुकड़ख़ोर
जो हमारी हड्डियों का चूरा तक बनाकर
बेच देते हैं बाज़ारों में,
फिर करते हैं दान-धरम और लगाते हैं तिलक छापा।
आप मनाते हैं न जाने कितने तरह के जश्न
जब हमारी बस्तियों में होता है सन्नाटा और सियापा।
हमारी बदतमीज़ी के लिए आप क़त्तई
हमें माफ़ नहीं करेंगे
पर हम यह कहे बिना रोक नहीं पा रहे हैं अपने आपको
कि ये जो “दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र”
है न महामहिम!
है ये अजब तमाशा और ग़ज़ब चूतियापा!

मज़दूर बिगुल, फ़रवरी 2022