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सम्पादकीय

बनारस का डी.एल.डब्‍ल्‍यू. कारखाना निजी पूँजीपतियों के हाथों औने-पौने बेचने की कोशिश

अर्थनीति : राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

ग्रामीण विकास योजनाओं की असलियत / विश्‍व‍नाथ

आन्दोलन : समीक्षा-समाहार

निजीकरण-कुचक्र और ट्रेड यूनियन आंदोलन की बुनियादी समस्‍याएं / ओ.पी.सिन्‍हा

स्त्री मज़दूर

इस तरह से चूसती हैं बहुराष्‍ट्रीय कम्‍पनियां गरीब मुल्‍कों की मेहनतकश औरतों का खून-पसीना / मीनाक्षी

लेखमाला

कम्‍युनिस्‍ट पार्टी का संगठन और उसका ढांचा (चौथी कि‍श्‍त) / व्‍ला.इ. लेनिन

बोल्‍शेविकों ने सत्‍ता पर कब्‍जा कैसे किया? (दूसरी कि‍श्‍त)

कला-साहित्य

कविता – ऐलान / गाेरख पाण्‍डेय

उद्धरण – मज़दूर काम करना बन्‍द कर दें तो / विवेकानंद

आपस की बात

गांव से उजड़े और दिल्‍ली में बसे एक मज़दूर की कहानी / शिवरतन

कविता – व्‍यवस्‍था / कुंतल कुमार जैन, बम्‍बई

कविता – समाजवाद / सूर्यदेव उपाध्‍याय, उल्‍हासनगर