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सम्पादकीय

इलेक्‍शन या इंकलाब? : सच्‍चाई से नजरें मिलाने की हिम्‍मत करो! सही राह चुनने का संकल्‍प बांधो!!

अर्थनीति : राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

पूँजीवादी राज्‍य में सार्वजनिक उद्योग : श्रमशक्ति के सार्वजनिक लूट का जरिया / ओमप्रकाश

श्रम कानून

श्रम कानून और पूँजीपति वर्ग द्वारा श्रमिकों का कानूनी-गैर कानूनी शोषण / डी.सी.वर्मा

विरासत

एकमात्र रास्‍ता – श्रमिक क्रान्ति / भगतसिंह

कम्‍युनिस्‍ट पार्टी, सरकारी सत्‍ता और वर्ग संघर्ष / जी. प्‍लेखानोव

मौका मिले तो फिर से क्रान्तिकारी परचम उठाना चाहेंगे / सुरेन्‍द्र कुमार (1946 के नाविक विद्रोह के भागीदार क्रान्तिकारी)

बुर्जुआ जनवाद – दमन तंत्र, पुलिस, न्यायपालिका

प्रदूषण नियन्‍त्रण कानून की आड़ में मज़दूरों की छंटनी : निष्‍पक्ष न्‍यायपालिका की पूँजीवादी पक्षधरता

स्त्री मज़दूर

बिहार में स्‍त्री-श्रमिकों की स्थिति : उनकी दुनिया का अंधेरा और अधिक गहरा है

लेखमाला

कम्‍युनिस्‍ट पार्टी का संगठन और उसका ढांचा (पहली कि‍श्‍त) / व्‍ला.इ. लेनिन

कारखाना इलाक़ों से

मौत का दरवाजा बन गई हैं मध्‍यप्रदेश की कपड़ा मिलें / मुकुल शर्मा

कला-साहित्य

कविता – कुर्सीनामा / गोरख पाण्‍डेय

कविता- पूँजीवादी समाज के प्रति / मुक्तिबोध

कविता : कम्‍युनिज्‍म / बर्तोल्‍त ब्रेख्‍त 

आपस की बात

आजाद कौन है? / संतोष कुमार, बरौनी

असंगठित मज़दूरों को क्रान्ति हेतु शिक्षित करना होगा / भास्‍कर, गोरखपुर

मज़दूरों की कलम से

मज़दूर कहलाने में लोग तौहीन समझने लगे हैं / जनेश्‍वर तिवारी, लखनऊ