(बिगुल के मार्च 2009 अंक में प्रकाशित लेख। अंक की पीडीएफ फाइल डाउनलोड करने के लिए  यहाँ क्लिक करें और अलग-अलग लेखों-खबरों आदि को यूनिकोड फॉर्मेट में पढ़ने के लिए उनके शीर्षक पर क्लिक करें)

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सम्पादकीय

अन्तरराष्‍ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर – आधी आबादी को शामिल किये बिना मानव मुक्ति की लड़ाई सफल नहीं हो सकती!! स्त्री मुक्ति के संघर्ष को सामाजिक-आर्थिक मुक्ति के व्यापक संघर्ष से जोड़ना होगा!

अर्थनीति : राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

आर्थिक संकट पूँजीवादी अर्थव्यवस्था की लाइलाज बीमारी है – पूंजीवादी आर्थिक संकट ‘‘अतिउत्पादन’’ का संकट है

मज़दूरों पर मन्दी की मार: छँटनी, बेरोज़गारी का तेज़ होता सिलसिला

जनता की कार, जनता पर सवार / कपिल स्वामी

श्रम कानून

मेट्रो मज़दूरों के अधिकारों पर मेट्रो प्रशासन का नया फ़ासीवादी हमला – कर्मचारियों को बुनियादी मानवाधिकारों-जनतान्त्रिक अधिकारों से वंचित करता डीएमआरसी का नया सर्कुलर

विशेष लेख / रिपोर्ट

राष्‍ट्रीय राजधानी में ग़रीबों के गुमशुदा बच्चों और पुलिस-प्रशासन के ग़रीब-विरोधी रवैये पर बिगुल मज़दूर दस्ता और नौजवान भारत सभा की रिपोर्ट

महान शिक्षकों की कलम से

जनवाद के लिए सबसे आगे बढ़कर लड़ने वाले के रूप में मज़दूर वर्ग / लेनिन

विरासत

भगतसिंह के शहादत दिवस (23 मार्च) के अवसर पर – अदालत में दिये गये बयान का एक हिस्‍सा

बुर्जुआ जनवाद – चुनावी नौटंकी

चुनाव? लुटेरों के गिरोह जुटने लगे हैं! जोड़-तोड़, झूठ-फरेब, धार्मिक उन्माद, नफ़रत, रक्तपात, भ्रष्‍टाचार से भरपूर भारतीय लोकतंत्र की पंचवर्षीय महानौटंकी का मंच सज रहा है!

लेखमाला

अदम्य बोल्शेविक – नताशा – एक संक्षिप्त जीवनी (तीसरी क़िश्त) / एल. काताशेवा

बोलते आँकड़े, चीख़ती सच्चाइयाँ

कैसी तरक्की, किसकी तरक्की? हमारे बच्चों को भरपेट खाना तक नसीब नहीं – भुखमरी की शिकार दुनिया की एक चौथाई आबादी भारत में / कपिल स्‍वामी

बोलते आँकड़े चीखती सच्चाइयाँ

महान जननायक

एक सच्चा सर्वहारा लेखक -मक्सिम गोर्की / नमिता

औद्योगिक दुर्घटनाएं

कब तक ऐसे मरते रहेंगे / राजविन्दर

कला-साहित्य

कात्यायनी की दो कविताएँ

आपस की बात

करोड़ों “स्‍लमडॉग” और मुट्ठीभर करोड़पति! / आनन्द सिंह, चेन्नई

मज़दूरों की कलम से

मज़दूरों के बारे में एक भोजपुरी गीत / सुभाष, लुधियाना