(मज़दूर बिगुल के नवम्‍बर-दिसम्‍बर 2012 अंक में प्रकाशित लेख। अंक की पीडीएफ फाइल डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें और अलग-अलग लेखों-खबरों आदि को यूनिकोड फॉर्मेट में पढ़ने के लिए उनके शीर्षक पर क्लिक करें)

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सम्पादकीय

“बुरे पूँजीवाद” के ख़िलाफ़ “अच्छे पूँजीवाद” की टुटपूँजिया, मध्यवर्गीय चाहत – केजरीवाल की ‘आम आदमी पार्टी’ और भ्रष्टाचार-विरोधी आन्दोलन – मज़दूर वर्ग को इस छल से बचना होगा! हमें “सन्त” पूँजीवाद नहीं, पूँजीवाद का क्रान्तिकारी विकल्प चाहिए! और हमें इस विकल्प का खाका पेश करना ही होगा!

फासीवाद

बाल ठाकरे: भारतीय फ़ासीवाद का प्रतीक पुरुष / आनन्‍द सिंह

संघर्षरत जनता

मारुति सुज़ुकी मज़दूरों का आन्दोलन इलाक़ाई मज़दूर उभार की दिशा में / अभिनव

महान शिक्षकों की कलम से

कम्युनिस्ट पार्टी की ज़रूरत के बारे में लेनिन के कुछ विचार…

मज़दूर वर्ग का नारा होना चाहिए – “मज़दूरी की व्यवस्था का नाश हो!” / कार्ल मार्क्‍स

उद्धरण / स्तालिन, एंगेल्‍स, लेनिन

लेखमाला

कैसा है यह लोकतन्त्र और यह संविधान किनकी सेवा करता है (चौदहवीं किश्त) – मूलभूत अधिकार – लम्बे-चौड़े वायदों के पीछे की सच्चाई / आनन्द सिंह

स्त्री मज़दूरों और उनकी माँगों के प्रति पुरूष मज़दूरों का दृष्टिकोण (दूसरी किस्त) / कविता कृष्‍णपल्‍लवी

इतिहास

क्रान्तिकारी चीन ने प्रदूषण की समस्या का मुक़ाबला कैसे किया और चीन के वर्तमान पूँजीवादी शासक किस तरह पर्यावरण को बरबाद कर रहे हैं! / सन्‍दीप

कारखाना इलाक़ों से

‘ब्राण्डेड’ कपड़ों के उत्पादन में लगे गुड़गाँव के लाखों मज़दूरों की स्थिति की एक झलक

एक मजदूर से बातचीत / आनन्‍द, बादली, द‍िल्‍ली

औद्योगिक दुर्घटनाएं

बंग्लादेश की हत्यारी गारमेंट फैक्टरियां / जयपुष्‍प

कला-साहित्य

एक सपने का गणित – जैक लण्डन के उपन्यास आयरन हील का एक अंश

मज़दूरों की कलम से

रणवीर की आपबीती / रणवीर सिंह, राजा‍ विहार

मज़दूरों की लाचारी (मालिक भी खुश, मज़दूर भी खुश) / आनन्‍द, बादली

मज़दूर भाइयों के नाम चिट्ठी / रीना देवी, बादल

सीटू की असलियत / रामाधार, बादली