दक्षिण दिल्ली के कुसुमपुर पहाड़ी में मज़दूर बिगुल अख़बार की हॉकिंग की गयी और डोर-टू-डोर अभियान चलाया गया
बजा बिगुल मेहनतकश जाग! चिंगारी से लगेगी आग!! 4 जुलाई, शुक्रवार को दक्षिण दिल्ली के कुसुमपुर पहाड़ी में मज़दूर बिगुल अख़बार की हॉकिंग की गयी और डोर-टू-डोर अभियान चलाया गया। मज़दूर बिगुल देश के मज़दूरों-मेहनतकशों के शोषण, असुरक्षा और संघर्षों का सिर्फ़ विवरण नहीं करता—बल्कि एक सर्वहारा दृष्टिकोण से इसका विश्लेषण करके यह बताता है कि इन हालातों के पीछे कौन-सी ताक़तें ज़िम्मेदार हैं और उनके ख़िलाफ़ लड़ने का रास्ता कैसा होगा। यह अख़बार अतीत की क्रान्तियों से सबक़ लेते हुए देश में एक नई समाजवादी क्रान्ति की वैचारिक राजनीतिक नींव रखने का काम करता है। समकालीन मुद्दों के अलावा बिगुल के पन्नों से मार्क्सवादी राजनीतिक अर्थशास्त्र, इतिहास, मज़दूर आन्दोलन के समस्याओं आदि विषयों पर लगातार लेख लिखे जाते रहे हैं। अभियान के दौरान लोगों से बढ़ती महँगाई, कम होती मज़दूरी, काम की असुरक्षा, आवास संकट जैसे मसलों पर बात करते हुए सिर्फ़ शिकायत नहीं, समाधान की दिशा में सोचने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया। लोगों ने एक स्वतंत्र मज़दूरवर्गीय अख़बार की अहमियत को समझते हुए यह माना कि आज मज़दूर वर्ग को गुमराह करने के लिए जिस तरह की झूठी ख़बरें, धार्मिक उन्माद और मनोरंजन के नाम पर फूहड़ और गलाजत भरी चीज़ें परोसी जा रही हैं, उसके बरक्स एक क्रान्तिकारी अख़बार का व्यापकतम प्रचार-प्रसार एक ज़रूरी कार्यभार है। कई लोगों ने बिगुल से आगे जुड़े रहने के लिए अपने सम्पर्क भी दिये। कुसुमपुर पहाड़ी में हर सप्ताह चलने वाले हॉकिंग और डोर टू डोर अभियान से अब तक का यह अनुभव रहा है कि मज़दूर वर्ग और मेहनतकश आबादी अपने हालात से बेख़बर नहीं है। जब उन्हें सर्वहारा दृष्टिकोण के साथ सही जानकारी दी जाती है, वे अपनी ज़िन्दगी की दुःख-तकलीफ़ों के बारे में गम्भीरता के साथ सोचते हैं और अपनी यथा-स्थिति को बदलने के बारे में विचार भी करते हैं।














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