बिगुल मज़दूर दस्ता ने बीते 17 नवंबर को जीडीमेटला औद्योगिक क्षेत्र स्थित रामि रेड्डी नगर में ‘मज़दूर बिगुल’ अख़बार का घर-घर वितरण अभियान चलाया। इस इलाक़े में मुख्य रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से आए प्रवासी मज़दूर रहते हैं, जो अधिकतर फ़ैब्रिकेशन वर्कशॉप और केमिकल फ़ैक्ट्रियों में काम करते हैं।
अभियान के दौरान मज़दूरों ने शोषण के कई गम्भीर मामलों के बारे में कार्यकर्ताओं को बताया। एक फ़ैब्रिकेशन यूनिट के वेल्डर ने बताया कि उसके साथ काम करने वाले तीन मज़दूरों सहित कुल चार लोगों के डेढ़ महीने के वेतन को ठेकेदार ने अन्यायपूर्ण तरीक़े से रोक लिया है। उस मज़दूर ने बिगुल के कार्यकर्ताओं से इस मामले में मार्गदर्शन करने का अनुरोध किया। इसके अलावा, एक महिला फ़ैक्ट्री मज़दूर ने बताया कि उसकी यूनिट में काम करते समय एक पुरुष मज़दूर की दो उँगलियाँ कट गईं। इस प्रकार की घटनाएँ जीडीमेटला औद्योगिक क्षेत्र में काम की भयावह परिस्थितियों की ओर इशारा करती हैं।
प्रत्यक्ष आर्थिक शोषण और मज़दूरों की सुरक्षा की गम्भीर लापरवाही के अतिरिक्त कार्यकर्ताओं को ऐसी जानकारियाँ भी प्राप्त हुईं जो प्रवासी मज़दूरों द्वारा झेली जा रही व्यवस्था की ढाँचागत समस्याओं की ओर संकेत करती हैं। एक मज़दूर ने बताया कि प्रवासी परिवारों को बुनियादी सामाजिक सुविधाओं तक को हासिल करने में कितनी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। मसलन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का पता लगाने में होने वाली कठिनाइयाँ और अपने बच्चों के लिए स्कूल में दाखिला दिलाने की जद्दोजहद।
इन कठिनाइयों के बावजूद, मज़दूरों ने अभियान का समर्थन किया और सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। कई मज़दूरो ने बिगुल के कार्यकर्ताओं को तुरन्त पहचान लिया, क्योंकि पिछले सप्ताह अक्टूबर क्रान्ति की सालगिरह के अवसर पर उनके क्षेत्र में एक नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया था। उन्होंने कार्यकर्ताओं का अपने घरों में गर्मजोशी से स्वागत किया। इस सकारात्मक व्यवहार का असर यह रहा कि लोगों में मासिक अख़बार के प्रति गहरी रुचि देखी गई। कई निवासियों ने अख़बार की प्रतियाँ खरीदीं, जो इस बात का संकेत है कि मज़दूरों में अपने संघर्षों को मज़दूर वर्ग के नज़रिये से समझने वाले साहित्य से जुड़ने की इच्छा बढ़ रही है।
 

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