बीते 15 नवम्बर को गुड़गाँव (हरियाणा) स्थित मारुति-सुज़ुकी कम्पनी के पास मज़दूरों को जागरूक और एकजुट करने के लिए ‘मज़दूर बिगुल’ अख़बार का वितरण अभियान चलाया गया!
बिगुल मज़दूर दस्ता के साथियों ने इस दौरान बातचीत में बताया कि मज़दूर वर्ग अपने क्रान्तिकारी राजनीतिक अख़बार के ज़रिये रोज़मर्रा की घटनाओं-मुद्दों व आन्दोलनों-संघर्षों को सही मज़दूर वर्गीय नज़रिये से समझ सकता है और अपने वर्गीय लक्ष्य निर्धारित कर सकता है।
इसी के आधार पर वे अपने संघर्ष को सही दिशा में सही तरीके से आगे बढ़ा सकते हैं।
मज़दूरों से बातचीत करने पर पता चलता है कि देश-दुनिया की तरह एक तरफ़ गुड़गाँव के इलाक़े में भी अस्थायीकरण, ठेकाकरण के चलते काम के घण्टे बढ़ते जा रहे हैं, सुविधाओं-सुरक्षा उपायों में कटौती की जा रही है। मशीनीकरण-ऑटोमेशन के ज़रिये काम के घण्टे कम करने की बजाय मज़दूरों को काम से निकाला जा रहा है। दूसरी तरफ़ रोज़ाना 12-14 घण्टे काम करने के बावजूद बढ़ती महँगाई की वजह से गुज़ारा करना मुश्किल होता जा रहा है। बेहतर दवा-इलाज और शिक्षा हासिल करना मुश्किल होता जा रहा है।
हमें स्थायी, सुरक्षित व रोज़गार के अधिकार के लिए एकजुट होकर संघर्ष की शुरुआत करनी ही होगी। इतिहास में मज़दूर वर्ग ने अपनी एकजुट ताक़त से संघर्षों को आगे बढ़ाया था और उसी से सीखकर आज हमें संघर्ष को लड़ना होगा।