चार लेबर कोड के ख़िलाफ़ अभियान चलाते हुए पिछले दिनों बिगुल मज़दूर दस्ता के कार्यकर्ता गोरखपुर में रेलवे के कार्यालयों, यार्ड और कोच की सफाई करने वाले कर्मचारियों के बीच पहुंचे।
मोदी सरकार द्वारा लागू किये गये मज़दूर-कर्मचारी विरोधी चार लेबर कोड के खिलाफ बात करते हुए बिगुल के कार्यकर्ताओं ने कहा कि चार लेबर कोड मोदी सरकार द्वारा कर्मचारियों और मज़दूरों के अधिकारों पर अब तक का सबसे बड़ा हमला है। कर्मचारियों और मज़दूरों को इस अभियान के तहत निकाला गया पर्चा देते हुए इन लेबर कोड पर विस्तार से बात की गयी।कर्मचारियों ने अपने अनुभव के आधार पर इन बातों से सहमति जताते हुए अपनी कार्यस्थितियों के बारे में और बातें साझा की। सरकारी कर्मचारियों ने कहा कि 8 घण्टे के काम का नियम बिरले ही लागू होता है क्योंकि खाली पड़े पदों पर नियुक्तियां नहीं होने से कर्मचारियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है और काम का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
कोच की सफाई करने वाले ठेका मज़दूरों ने बताया कि उनसे बेहद नारकीय परिस्थितियों में काम कराया जाता है। काम करने के लिए सामान्य उपकरण भी बेहद ख़राब व अपर्याप्त दिये जाते हैं। काम के भारी दबाव के बीच ठेकेदार शोषण करता रहता है। बीमारी या किसी अन्य ज़रूरी काम से 1 दिन काम पर न आने पर 1 दिन की जगह 2 दिन की दिहाड़ी काट ली जाती हैं। कागज़ों पर तो हम लोगों को न्यूनतम वेतन 17000 रुपया मिलता है लेकिन वास्तव में सभी काम करने वाले लोगों को 7 हज़ार से 10 हज़ार रुपए ही मिलते हैं, बाकी ठेकेदार व अन्य लोग खा जाते हैं।
बिगुल के कार्यकर्ताओं ने कहा कि चार लेबर कोड इस लूट को क़ानूनी जामा पहनाने और मज़दूरों के हर तरह के अधिकारों को ख़त्म करने के लिए ही लाये गये हैं। ऐसे में इसके ख़िलाफ़ अनिश्चितकालीन आम हड़ताल की दिशा में बढ़ना ही एकमात्र रास्ता है।













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