प्रदर्शन में बात रखते हुए बिगुल मज़दूर दस्ता के साथियों ने कहा कि, नोएडा पुलिस द्वारा पूरे क़ानून और संविधान को ताक़ पर रखकर ये गिरफ़्तारी की गयी है। ये गिरफ़्तारी बताती है कि योगी-मोदी राज में हक़ और न्याय की माँग करना भी ग़ैर क़ानूनी है! 24 घण्टे बीत जाने के बावजूद अभी तक चारों मज़दूर कार्यकर्ताओं को किसी भी कोर्ट में पेश नहीं किया गया है। यूपी पुलिस की तानाशाही यही नहीं रुकती है! राजनीतिक कार्यकर्ताओं की जमानत के लिए आज अपील दाख़िल करने गए दो वकीलों और उनके साथ के दो और साथियों को भी यूपी पुलिस ने सूरजपुर कोर्ट के बाहर मारपीट करते हुए गिरफ़्तार कर लिया! यह पूरी तरह खाकी वर्दी की गुंडागर्दी और तानाशाही है जिसे किसी भी क़ीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। इसके ख़िलाफ़ हमें एकजुट होना होगा और आगे आना होगा।
पिछले कुछ दिनों से दिल्ली एनसीआर सहित तमाम औद्योगिक क्षेत्रों में मज़दूर बढ़ती महँगाई, बेरोज़गारी और अमानवीय कार्य परिस्थितियों के कारण आन्दोलनरत हैं। देशभर में इसको लेकर लगातार हड़तालें हो रही हैं। इन हड़तालों में वेतन वृद्धि, 8 घण्टे का कार्यदिवस और ठेका प्रथा ख़त्म करने की माॅंगें उठायी जा रही हैं। इस असन्तोष से घबराकर पूँजीपति वर्ग पुलिस दमन का सहारा ले रहा है। ऐसे में हम तमाम मेहनतकश मज़दूरों, जागरूक नागरिकों, युवाओं और छात्रों से अपील करते हैं कि वे मज़दूरों के संघर्ष के अधिकार पर इस हमले के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ उठाएँ और गिरफ़्तार साथियों की रिहाई के लिए दबाव बनाएंँ।
पुलिस दमन मुर्दाबाद!
मज़दूर एकता ज़िंदाबाद!