पानीपत रिफ़ाइनरी के मज़दूरों की सभी जायज़ माँगों को पूरा करो!
हर ज़ोर-ज़ुल्म की टक्कर में – संघर्ष हमारा नारा है!
बिगुल संवाददाता
हरियाणा में पानीपत स्थित ‘इण्डियन ऑयल कॉरपोरेशन’ की रिफ़ाइनरी में काम करने वाले हज़ारों मज़दूरों को अमानवीय हालात से तंग आकर हड़ताल को मजबूर होना पड़ा। 23 फ़रवरी को रिफ़ाइनरी के विस्तार और निर्माण कार्य में लगे ठेका मज़दूरों ने अपनी जायज़ माँगों को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। यहाँ कार्यरत मज़दूर काम के घण्टे, ओवरटाइम, परिवहन व्यवस्था, शौचालय की सुविधा, ईएसआई-पीएफ़, कैण्टीन की सुविधा, सुरक्षा कर्मियों के ख़राब व्यवहार आदि जैसे मुद्दों को लम्बे समय से उठाते रहे थे।
लेकिन रिफ़ाइनरी प्रशासन ने इनकी माँगों पर कोई ध्यान नहीं दिया। इस असंवेदनशील रवैये से तंग आकर और दुर्घटना में दो मज़दूरों की मौत तथा एक के बुरी तरह घायल होने के बाद उनके सब्र का बाँध टूट गया। उन्होंने शान्तिपूर्ण प्रदर्शन और हड़ताल का रास्ता अपनाया, पर मैनेजमेंट के आदेश पर पुलिस और सीआईएसएफ़ के जवान मुस्तैदी के साथ मज़दूरों को कुचलने में जुट गये। लेकिन मज़दूरों के बुलन्द हौसलों को तोड़ने में नाकाम होने की स्थिति में “बातचीत” द्वारा समाधान निकालने की बात कही गयी।
हरियाणा के पानीपत में स्थित इस रिफ़ाइनरी की विभिन्न इकाइयों और विस्तार योजनाओं में 30 हज़ार से ज़्यादा मज़दूर-कर्मचारी काम करते हैं। इनमें से ज़्यादातर श्रमिक ठेकेदारों के तहत कार्यरत हैं। दमन और शोषण का सबसे ज़्यादा सामना इन्हीं ठेका श्रमिकों को करना पड़ता है। जानकारी के अनुसार यहाँ की कुल रिफ़ाइनिंग क्षमता लगभग 15 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) तक पहुँच चुकी है लेकिन हज़ारों ठेका मज़दूर, जो इस रिफ़ाइनरी के निर्माण, रखरखाव और उत्पादन कार्यों में लगे हैं, आज अपने बुनियादी अधिकारों तक से महरूम हैं। यहाँ कार्यरत मज़दूरों के आरोप हैं कि उन पर 12-12 घण्टे काम कराने का दबाव बनाया जाता है, ओवरटाइम का सही भुगतान नहीं होता, वेतन में देरी होती है, ईएसआई-पीएफ़ जैसे अधिकार सही तरीक़े से नहीं मिलते और आवाज़ उठाने पर ठेकेदारों द्वारा काम से निकालने की धमकियाँ दी जाती हैं।
काम करने के हालात बेहद अमानवीय हैं। मज़दूरों को पीने का साफ़ पानी, शौचालय, परिवहन, कैण्टीन और पर्याप्त सुरक्षा उपकरण जैसी मूलभूत सुविधाएँ भी ठीक से नहीं मिलती हैं। रिफ़ाइनरी जैसे संवेदनशील और जोखिमपूर्ण कार्यस्थल पर इन अमानवीय हालात में मज़दूरों से काम लिया जाना सीधे तौर पर उनके जीवन के साथ खिलवाड़ है।
ध्यान रहे, मज़दूरों के ये हालात तो तब हैं जब मज़दूर-कर्मचारी विरोधी चार लेबर कोड अभी लागू नहीं हुए हैं। ये लेबर कोड लागू होने के बाद मज़दूरों की स्थिति का अन्दाज़ा सहज ही लगाया जा सकता है।
हम पानीपत रिफ़ाइनरी के मज़दूरों की सभी माँगों का पुरज़ोर समर्थन करते हैं। हम रिफ़ाइनरी प्रशासन और सरकार से माँग करते हैं मज़दूरों की सभी माँगों को तत्काल प्रभाव से पूरा किया जाये। मज़दूरों पर किसी भी तरह की बदले की या दमन की कार्रवाई को तत्काल रोका जाये।
बिगुल मज़दूर दस्ता और भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी (RWPI) इस लड़ाई में पानीपत रिफ़ाइनरी के मज़दूरों के साथ हैं और उन्होंने मज़दूरों की इन सभी माँगों को पूरा करने की माँग की है :
- काम के घण्टे 8 हों और इन्हें सख़्ती से लागू किया जाये।
- वेतन का भुगतान हर महीने की 1 से 7 तारीख के बीच पक्का किया जाये और 240 दिन पूरे होने पर पूरी देय राशि का भुगतान तुरन्त किया जाये।
- कम्पनी के बोर्ड रेट के अनुसार वेतन दिया जाए और प्रॉविडेंट फ़ण्ड (PF) की रकम श्रमिक के बराबर और नियमित रूप से जमा की जाये।
- ओवरटाइम का भुगतान डबल रेट से किया जाए।
- काम के दौरान किसी भी दुर्घटना की स्थिति में कम्पनी पूरी ज़िम्मेदारी ले और उचित मुआवज़ा दे।
- के.के.एस. से उठाये गये मज़दूर साथियों को तत्काल रिहा किया जाये।
- सभी राष्ट्रीय अवकाश मजदूरों को दिये जायें।
- मासिक ड्यूटी 26 कार्यदिवस तय की जाये।
- कार्यस्थल पर शौचालय और स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था की जाए।
मज़दूर बिगुल, फरवरी 2026













