(मज़दूर बिगुल के अक्टूबर 2023 अंक में प्रकाशित लेख। अंक की पीडीएफ़ फ़ाइल डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें और अलग-अलग लेखों-ख़बरों आदि को यूनिकोड फ़ॉर्मेट में पढ़ने के लिए उनके शीर्षक पर क्लिक करें)

 

 

सम्पादकीय

जनता के जनवादी अधिकारों पर आक्रामक होता फ़ासीवादी मोदी सरकार का हमला और इक्कीसवीं सदी में फ़ासीवाद के बारे में कुछ बातें

फासीवाद / साम्‍प्रदायिकता

“महँगाई-बेरोज़गारी भूल जाओ! पाकिस्तान को सबक सिखाओ!” गोदी मीडिया की गलाफाड़ू चीख-पुकार, यानी चुनाव नज़दीक आ गये हैं! / लता

विशेष लेख / रिपोर्ट

अगर न्याय नहीं है, तो शान्ति कैसे हो सकती है?

कब तक अमीरों की अय्याशी का बोझ हम मज़दूर-मेहनतकश उठायेंगे! / भारत

संघर्षरत जनता

गाज़ा पर इज़रायली सेटलर औपनिवेशिक घेरेबन्दी मुर्दाबाद! गाज़ा पर इज़रायली कब्ज़ा मुर्दाबाद! फ़िलिस्तीनी जनता का मुक्ति संघर्ष ज़िन्दाबाद!

समाज

महिला आरक्षण बिल पर सर्वहारावर्गीय नज़रिया क्या हो? / प्रियम्वदा

बुर्जुआ जनवाद – चुनावी नौटंकी

चुनाव नज़दीक आते ही मोदी सरकार द्वारा रसोई गैस की क़ीमत घटाने के मायने / नौरीन

छह राज्यों की सात विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के नतीजे और उनके मायने / आशीष

साम्राज्यवाद / युद्ध / अन्धराष्ट्रवाद

ब्रिक्स और जी-20 शिखर सम्मेलनों में साम्राज्यवाद के बदलते समीकरणों की अनुगूँजें / आनन्द

शिक्षा और रोजगार

निराशा, अवसाद और पस्तहिम्मती छात्रों को आत्महत्या की तरफ धकेल रही है / अविनाश (मुम्बई )
ग्रामीण आजीविका मिशन : ग्रामीण महिलाओं और बेरोज़गार नौजवानों के श्रम को लूटने का मिशन / अविनाश

लेखमाला

मज़दूर आन्दोलन में मौजूद किन प्रवृत्तियों के ख़िलाफ़ मज़दूर वर्ग का लड़ना ज़रूरी है? – (सातवीं क़िस्त) / शिवानी

कला-साहित्य

कविता – फ़िलिस्तीन / कात्यायनी

मज़दूरों की कलम से

आपस की बात – वेल्डिंग कम्पनी के मजदूरों के हालात / मुकेश, दिल्ली