119वें जन्मदिवस (28 सितम्बर) के मौक़े पर शहीद-ए-आज़म भगतसिंह की संस्मृतियाँ
उनका कहना था कि अंग्रेज़ी दासता के विरुद्ध संघर्ष तो हमारे युद्ध का पहला मोर्चा है। अन्तिम लड़ाई तो हमें शोषण के विरुद्ध ही लड़नी पड़ेगी। चाहे वह शोषण मनुष्य द्वारा मनुष्य का हो या एक राष्ट्र द्वारा दूसरे राष्ट्र का हो। यह लड़ाई जनता के सहयोग के बग़ैर नहीं लड़ी जा सकती। इसलिए हमें हर सम्भव उपायों से जनता के अधिक से अधिक निकट पहुँचने का प्रयास करते रहना चाहिए। नौजवान भारत सभा की स्थापना, मज़दूर सभा में काम, पत्र-पत्रिकाओं में लेख-मालाएँ, मैजिक लैटर्न का प्रयोग, पर्चे और पैम्पलेट आदि इसी प्रयास के अंग थे।














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