संसद में खुलासा : विदेशों में हर दिन 20 से अधिक भारतीय मज़दूरों की मौत
भारत के मज़दूरों की यह दयनीय स्थिति केवल देश के भीतर ही नहीं है, बल्कि विदेशों में रोज़गार की तलाश में गए भारतीयों के लिए यह स्थिति और भी गम्भीर रूप में मौजूद है। आम लोगों को यह लगता है कि विदेशों में जाकर उनकी स्थिति सुधर जायेगी और वहाँ के कानून अधिक प्रभावी होंगे, मज़दूरी अधिक होगी, अधिक श्रम अधिकार होंगे, लेकिन सच्चाई इसके विपरीत और बेहद भयावह है। विदेश मामलों के राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह द्वारा राज्यसभा में दिए गए लिखित उत्तर के अनुसार, पिछले पांच वर्षों (2021-2025) में विदेशों में 37,740 भारतीय श्रमिकों की मृत्यु हुई है। इसका अर्थ है कि प्रतिदिन औसतन 20 से अधिक भारतीय कामगार अपनी जान गँवा रहे हैं।














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