(मज़दूर बिगुल के मार्च-अप्रैल 2014 अंक में प्रकाशित लेख। अंक की पीडीएफ फाइल डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें और अलग-अलग लेखों-खबरों आदि को यूनिकोड फॉर्मेट में पढ़ने के लिए उनके शीर्षक पर क्लिक करें)

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सम्पादकीय

16वाँ लोकसभा चुनाव: पंचवर्षीय ख़र्चीला पूँजीवादी जलसा! – वे अपना विकल्प चुन रहे हैं! हमें अपना विकल्प चुनना होगा! – लेकिन भारत के मज़दूर वर्ग के सामने विकल्प क्या है?

अर्थनीति : राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

केजरीवाल की आर्थिक नीति: जनता के नेता की बौद्धिक कंगाली या जोंकों के सेवक की चालाकी

संघर्षरत जनता

कम्बोडिया में मज़दूर संघर्षों का तेज़ होता सिलसिला

महान शिक्षकों की कलम से

जनवादी जनतन्त्र: पूँजीवाद के लिए सबसे अच्छा राजनीतिक खोल / लेनिन

“निजी स्वतन्त्रता” / स्‍तालिन

विरासत

मज़दूरों-मेहनतकशों के नायक को चुराने की बेशर्म कोशिशों में लगे धार्मिक फासिस्ट और चुनावी मदारी / सत्‍यप्रकाश

बुर्जुआ जनवाद – दमन तंत्र, पुलिस, न्यायपालिका

मज़दूर संगठनकर्ता राजविन्दर को लुधियाना अदालत ने एक फर्जी मामले में दो साल क़ैद की सज़ा सुनायी

ओरियण्ट क्राफ़्ट में फिर मज़दूर की मौत और पुलिस दमन

महान जननायक

कॉ. शालिनी की पहली बरसी पर क्रान्तिकारी श्रद्धांजलि

औद्योगिक दुर्घटनाएं

मालिकों के मुनाफ़े की हवस में अपाहिज हो रहे हैं मज़दूर

गतिविधि रिपोर्ट

करावल नगर मज़दूर यूनियन ने दो दिवसीय मेडिकल कैम्प अयोजित किया।

दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न इलाक़ों में चुनावी राजनीति का भण्डाफोड़ अभियान

पाँचवीं अरविन्द स्मृति संगोष्ठी की रिपोर्ट – इक्कीसवीं सदी में सर्वहारा क्रान्ति के नये संस्करणों और नये समाजवादी प्रयोगों की तैयारी के लिए बीसवीं सदी में समाजवादी संक्रमण की समस्याओं पर अध्ययन-चिन्तन और बहस के ज़रिये सही नतीजों तक पहुँचना ज़रूरी है

कला-साहित्य

“महान अमेरिकी जनतन्‍त्र” के “निष्पक्ष चुनाव” की असली तस्वीर – अप्टन सिंक्लेयर के विश्वप्रसिद्ध उपन्यास ‘जंगल’ के कुछ अंश

कविता – मेरा अब हक़ बनता है / पाश

कविता – लोकतन्त्र के बारे में नेता से मज़दूर की बातचीत / नकछेदी लाल

मज़दूरों की कलम से

सी.सी.टीवी से मज़दूरों पर निगरानी / प्रेमकुमार, नरेला औद्योगिक क्षेत्र, दिल्‍ली

किस आम आदमी की दुहाई दे रही हैं राजनीतिक पार्टियाँ! / भारत, दिल्‍ली